अनूपपुर: 17 जिलों की अर्थव्यवस्था की जमीनी मैपिंग शुरू, लक्ष्य-हर हाथ को काम, हर घर स्वदेशी, हर युवा उद्यमी
अनूपपुर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। देश को विकसित बनाने की राह अब मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से होकर गुजरेगी। इसी सोच के साथ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के डिपार्टमेंट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन में गुरूवार को आयोजित “मैराथन टेक्नोलॉजी लाइव प्रोजेक्ट हैकाथॉन” में बीवॉक के छात्रों ने देश के 17 जिलों को विकसित बनाने का व्यवहारिक लाइव प्रोजेक्ट शुरू किया।
कार्यक्रम में फैकल्टी के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. विकास सिंह, सहायक प्राध्यापक डॉ. कमलेश पांडे, अनुराग सिंह, गोपेश्वर प्रजापति, अजीत कुर्रे, ओम प्रकाश पाठक, रंजन कुमार, आशीष गुप्ता, रामभाऊ कोठार, अभिनेंद्र सिंह, जगदीश और खेलन सिंह और के उपस्थित रहे। शोध छात्र हरीश विश्वकर्मा और विशाल ताम्रकार सहित 700 से अधिक छात्र-छात्राओं ने “यंग जनरेशन भारत” के रूप में इसमें उत्साह से भाग लिया।
सुबह के टूथब्रश से रात के बिस्तर तक-हर जरूरत का हिसाब
हैकाथॉन में जिलों के स्थानीय संसाधन, रोजगार की स्थिति, उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाओं के साथ स्वयं सहायता समूह , किसान उत्पादक कंपनी, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, बागवानी और पर्यटन पर गहन मंथन हुआ। एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड मैनेजमेंट, मीडिया, आर्ट एंड क्राफ्ट तथा टेक्नोलॉजी एंड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्रांच के छात्रों ने हर जिले की जीडीपी, अर्थव्यवस्था और वहाँ खपत होने वाले फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स की मैपिंग की। टूथब्रश से लेकर सुई-धागा, कपड़े और बर्तन धोने का सामान, घरेलू रसायन, उर्वरक, वस्त्र, सेमी-इलेक्ट्रॉनिक्स, आयुष उत्पाद और दवाइयों तक, हर वस्तु को दैनिक, साप्ताहिक और मासिक जरूरत में बाँटकर यह पहचाना गया कि कौन-से उत्पाद जिले के युवा जिले में ही बना सकते हैं। लक्ष्य साफ़ है, बाहर से आने वाले पैकेट-बंद आटा, तेल, चावल, मसाले और डेयरी उत्पादों की जगह स्थानीय उत्पाद, ताकि विकेंद्रीकृत और जिला-आधारित अर्थव्यवस्था खड़ी हो सके।
हर कारीगर, हर दुकानदार, हर समूह एक मंच पर
प्रोजेक्ट में जिले की सेवा-आधारित गतिविधियाँ और पर्यटन के विविध आयाम, जैसे वेलनेस, होमस्टे, मालिश और एडवेंचर टूरिज्म भी शामिल हैं। जिले की संस्कृति और विशेषताओं पर आधारित फिल्म व वेब सीरीज़ निर्माण की संभावनाएँ भी तलाशी जाएँगी। जिले के सभी महिला समूह, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, किसान उत्पादक कंपनियाँ, वनधन विकास केंद्र, छोटे-मझोले दुकानदार और पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़े चर्मकार, लोहार, बढ़ई, कुम्हार जैसे वे कारीगर, जिन्हें आज काम नहीं मिल पा रहा, इस मैपिंग से जुड़ेंगे। मूल मंत्र है “प्रत्येक हाथ को काम और प्रत्येक काम के लिए हाथ”, ताकि जिले का एक भी युवा बेरोजगार न रहे और सहकारिता मॉडल से अंतिम व्यक्ति भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उद्यमिता से जुड़ सके।
हर जिले में 5 से 6 हजार करोड़ का स्थानीय कारोबार संभव
डीन प्रो. विकास सिंह और अनुराग सिंह ने बताया कि इन 17 जिलों में प्रत्येक की अर्थव्यवस्था लगभग 10 से 12 हजार करोड़ रुपये की है, जिसमें 5 से 6 हजार करोड़ रुपये का कारोबार केवल दैनिक जरूरतों की वस्तुओं का है। यह सामान स्थानीय युवा अपने ही जिले में बना सकते हैं। प्लास्टिक में बाहर से आने वाले आटा, चावल, दाल, तेल, दूध, दही, आइसक्रीम और मसाले जिले में ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के ज़रिए प्लास्टिक-मुक्त और प्रिजर्वेटिव-मुक्त रूप में तैयार होंगे, जिससे लोगों को ताजा, शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक सामान मिलेगा। सब्जी विक्रेताओं की सहकारी समितियाँ बनाकर बेहतर आपूर्ति शृंखला तैयार होगी और कारीगर अपनी सेवाएँ व उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुँचा सकेंगे। उन्होंने कहा कि जिन समूह महिलाओं और घरेलू उद्यमियों को आज बाजार नहीं मिल पाता, उनके लिए यह प्लेटफॉर्म मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय संसाधनों के पर्यावरण-हितैषी उपयोग से जल, नदी और पहाड़ भी सुरक्षित रहेंगे और हर व्यक्ति को काम मिलेगा।
जिला विकसित होगा, तो देश विकसित होगा
प्रो. विकास सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के “सहकार से समृद्धि” विजन को धरातल पर उतारने की पहल है। “हर घर स्वदेशी, हर युवा उद्यमी” की सोच के साथ इसमें जिले की 50 प्रतिशत आबादी की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। जिले के अधिकारी, आध्यात्मिक और पर्यटन स्थल, दुकानदार और कारीगर एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आएँगे, जहाँ उन्हें बाज़ार, मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण एक साथ मिलेगा। “मेरा जिला, विकसित जिला” की तर्ज़ पर अभी 17 जिलों में काम शुरू हुआ है, और सफलता मिलने पर इसे 400 जिलों तक ले जाने की योजना है। प्रो. सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी में ऐसा लाइव प्रोजेक्ट अब तक देश के किसी विश्वविद्यालय, आईआईटी या एनआईटी में शुरू नहीं हुआ है। “कनेक्ट भारत” और “मेरा जिला मेरा देश” के माध्यम से गाँव और नगर के लोगों को जोड़कर स्वास्थ्य, स्वच्छता और हाइजीन के साथ एक मजबूत उद्यमिता और स्किलिंग इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा।
हैकाथॉन के अंत में 17 जिलों का कार्य 712 छात्र-छात्राओं में बाँटा गया। विभाग के सहायक प्राध्यापक इन टीमों का मार्गदर्शन करेंगे और देशभर के अर्थशास्त्र, प्रौद्योगिकी व बिजनेस मैनेजमेंट के विशेषज्ञ भी इस प्रोजेक्ट से जोड़े गए हैं। इसी कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के लक्ष्मण ऑडिटोरियम में विभाग के विद्यार्थियों द्वारा विकसित हाइपरलोकल मार्केटप्लेस ऐप एवं वेबसाइट आँनकिट’ का शुभारंभ भी हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

