home page

अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

 | 
अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालु


अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालु


अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालु


अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालु


अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालु


अनूपपुर, 15 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में गणेशोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में इस वर्ष 226 स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंगलवार को भी घरों और सार्वजनिक पंडालों तक गणपति बप्पा की प्रतिमाएं पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा। शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक श्रद्धालु उत्साह के साथ गणेश प्रतिमाओं को पंडालों और घरों में ले जाते नजर आए।

कहीं श्रद्धालु गणेश प्रतिमा को सिर पर रखकर ले जाते दिखाई दिए तो कहीं दोपहिया और बड़े वाहनों से प्रतिमाओं को पंडालों तक पहुंचाया गया। घरों में भी विधि-विधान के साथ गणपति की स्थापना की जा रही है। मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में आने वाले दिनों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां की हैं।

चचाई में सबसे अधिक गणेश प्रतिमाएं

पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में स्थापित की गई 226 प्रतिमाओं में 132 छोटी और 94 बड़ी प्रतिमाएं शामिल हैं। थाना क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार कोतवाली क्षेत्र में 31, चचाई में 32, जैतहरी में 25, कोतमा में 18, भालूमाड़ा में 21, बिजुरी में 34, राजेंद्रग्राम में 19, अमरकंटक में 7 और करनपठार थाना क्षेत्र में 19 स्थानों पर गणेशोत्सव मनाया जा रहा है।

गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही कई स्थानों पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। सार्वजनिक पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में आस्था की डुबकी

मंगलवार को ऋषि पंचमी के अवसर पर महाराष्ट्र से अमरकंटक पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य सलिला मां नर्मदा के रामघाट तट पर स्नान और पूजन किया। सुबह करीब 5 बजे से महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों से श्रद्धालुओं के अमरकंटक पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

नागपुर, कामठी, भंडारा, अमरावती, नासिक, पुणे और बारामती सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों से आई महिलाओं ने नर्मदा तट पर पहुंचकर विधि-विधान से स्नान किया। इसके बाद ध्यान, जप, पूजन-अर्चन और आरती का दौर चलता रहा। नर्मदा की कल-कल करती धारा, वैदिक मंत्रोच्चार और महिलाओं की सामूहिक आरती से रामघाट का वातावरण भक्तिमय हो गया।

नर्मदा तट पर महिलाओं ने बनाए पार्थिव शिवलिंग

ऋषि पंचमी के धार्मिक विधान के अनुसार महिलाओं ने नर्मदा तट पर मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। इसके साथ ही प्रकृति से प्राप्त पत्तियों, फूल, बेलपत्र, घास-फूस और खेतों में उपलब्ध अनाज जैसी पारंपरिक सामग्रियों से भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार कीं।

महिलाओं ने पार्थिव शिवलिंग और गणेश प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया। भगवान शिव और गणपति बप्पा को पुष्प, बेलपत्र तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर आरती की गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं के सामूहिक पूजन से नर्मदा तट पर श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल नजर आया।

ऋषि पंचमी का क्या है धार्मिक महत्व?

हिंदू धर्म परंपरा में भाद्रपद शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली ऋषि पंचमी का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और आत्मशुद्धि की भावना से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, ऋषियों का स्मरण और पूजा करने से जीवन में शुद्धता, संयम और सदाचार के भाव मजबूत होते हैं।

विशेष रूप से महिलाएं ऋषि पंचमी के अवसर पर व्रत और पूजन कर ऋषि परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करती हैं। यह पर्व प्रकृति, ऋषि परंपरा और सनातन संस्कारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। नर्मदा उद्गम क्षेत्र और तपोभूमि अमरकंटक में इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

तीन-चार साल से अमरकंटक पहुंच रहे महाराष्ट्र के श्रद्धालु

बताया जाता है कि महाराष्ट्र से श्रद्धालु महिलाएं और अन्य भक्त पिछले तीन-चार वर्षों से लगातार ऋषि पंचमी के अवसर पर अमरकंटक पहुंच रहे हैं। नर्मदा स्नान, मां नर्मदा के दर्शन और भगवान शिव तथा गणेश के पूजन के लिए महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

इस वर्ष भी सैकड़ों वाहनों से महिलाएं, पुरुष और अन्य श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी और अनुमान के अनुसार इस बार करीब 14 से 15 हजार श्रद्धालुओं के अमरकंटक पहुंचने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से अमरकंटक में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला