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देश के 88 श्रेष्ठ व्यंग्यकारों के संकलन में उज्जैन के पांच व्यंग्यकार

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देश के 88 श्रेष्ठ व्यंग्यकारों के संकलन में उज्जैन के पांच व्यंग्यकार


उज्जैन, 20 जनवरी (हि.स.)। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में व्यंग्य विधा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल के रूप में व्यंग्य के रंग नामक संकलन का लोकार्पण एवं परिचर्चा विश्व पुस्तक मेले, प्रगति मैदान नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस पुस्तक में देश विदेश के 88 प्रतिष्ठित व्यंग्यकारों की श्रेष्ठ रचनाएं संकलित की गईं हैं,जिनमें उज्जैन के पाँच व्यंग्यकार डॉ. बीएल आच्छा, डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, डॉ. हरीशकुमार सिंह, राजेंद्र नागर निरंतर और मीरा जैन की रचनाओं को स्थान मिला है।

यह जानकारी मंगलवार को साहित्यकार हरीशकुमार सिंह ने दी। उन्होने बताया कि इस पुस्तक का प्रकाशन ’अद्विक पब्लिकेशन’ के द्वारा किया गया। अद्विक पब्लिकेशन निरंतर साहित्यिक मूल्यों के संरक्षण, संवर्धन और रचनाकारों को मंच प्रदान करने में अग्रणी रहा है। व्यंग्य के रंग केवल एक पुस्तक ही नहीं बल्कि समकालीन समाज, राजनीति, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दर्पण है। इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में इस बात पर विशेष रूप से मंथन हुआ कि व्यंग्य साहित्य को अक्सर केवल हास्य का माध्यम समझा जाता है। यह समाज की विसंगतियों, विडंबनाओं और विरोधाभासों को उजागर करने की सबसे सशक्त विधा है। व्यंग्य के रंग इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पाठकों को न केवल हंसने के लिए प्रेरित करता है बल्कि सोचने, आत्ममंथन करने और प्रश्न उठाने की चेतना भी प्रदान करता है।

इस पुस्तक में संकलित रचनाएं आम आदमी की पीड़ा, सत्ता की विडंबनाएं, सामाजिक दिखावे, बदलते मूल्यों और आधुनिक जीवनशैली की विसंगतियों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं। व्यंग्य के रंग एक ऐसा व्यंग्य-संग्रह है, जिसमें विविध विषयों, शैलियों और दृष्टिकोणों का अनूठा समावेश देखने को मिलता है। पुस्तक में शामिल 88 व्यंग्यकारों की रचनाएं यह सिद्ध करती हैं कि हिंदी व्यंग्य केवल एक शैली नहीं, बल्कि एक सशक्त वैचारिक आन्दोलन भी है। इस व्यंग्य-संकलन का सम्पादन पवन कुमार जैन एवं परवेश जैन द्वारा किया गया है। पवन कुमार जैन एक अनुभवी साहित्यकार हैं जिनका साहित्यिक सफर हाइकु, व्यंग्य, कहानी और स पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय रहा है। वहीं परवेश जैन समकालीन साहित्य में सक्रिय, सजग और प्रतिबद्ध लेखक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।

इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में व्यंग्य विधा को नए संदर्भों में समझने और परखने का अवसर प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि यह पुस्तक प्रसिद्ध व्यंग्यकार और कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को समर्पित है जिन्होंने जमीन से जुड़े तमाम करेक्टर गढ़े और उनके माध्यम से आमजनों की समस्याओं को निरूपित किया। इस साहित्यिक आयोजन में सभी साहित्यप्रेमियों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और पाठकों को सादर आमंत्रित किया गया। सहयोगी रचनाकार डॉ. सुभाष चन्दर, डॉ. गिरीश पंकज, आचार्य राजेश कुमार, डॉ. लालित्य ललित, रण विजय राव, पंकज प्रसून, अर्चना चतुर्वेदी, रेनू अस्थाना, सीमा चड्ढा, विजय आनंद दुबे, अशोक कुमार गुप्ता प्रकाशक एवं विपिन भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल