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इंदौर में रिंग रोड परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में सड़क पर उतरे किसान, अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट का किया घेराव

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इंदौर में रिंग रोड परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में सड़क पर उतरे किसान, अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट का किया घेराव


इंदौर में रिंग रोड परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में सड़क पर उतरे किसान, अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट का किया घेराव


इंदौर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में पूर्वी रिंग रोड परियोजना और इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के विरोध में सैकड़ों किसान गुरुवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर अर्धनग्न होकर धरने पर बैठ गए। गले में कृषि, नवाचार और सामाजिक कार्यों के लिए मिले मेडल और सम्मान चिह्न टांगकर किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी से एक बुजुर्ग किसान की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर जमीन पर लेट गए।

किसानों का कहना है कि एक इंच जमीन नहीं देंगे। सिहंस्थ 2026 के लिए ये सब हो रहा है, जबकि 4 सड़कें पहले से हैं। इसके बाद भी किसानों की जमीन छीनी जा रही है। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित पूर्वी आउटर रिंग रोड के लिए लगभग 44 गांवों और करीब 1200 किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। किसान गौतम बंटू गुर्जर ने कहा कि पूर्वी इलाके में पहले से ही तीन-चार कनेक्टिंग रोड हैं। इनमें RI-2, RI-3 और बाईपास शामिल हैं। उनका कहना है कि यह जमीन साल में तीन से चार फसलें देती है और मालवा-निमाड़ क्षेत्र की खाद्य आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसानों ने साफ कहा—“एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। जमीन गई तो परिवार भूखा मर जाएगा।” जब हमारे पास खेती की जमीन ही नहीं बचेगी तो वे अवॉर्ड का क्या करेंगे? खेती किसानों की आत्मा है। हम पूरे देश के लोगों का पेट भरते हैं। अगर सरकार सीमेंट और कंक्रीट का जंगल बना देगी तो किसान कहां जाएंगे?

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सर्वे प्रक्रिया और मुआवजा निर्धारण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनकी मांग है कि बाजार दर से कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए, पुनर्वास नीति स्पष्ट की जाए और आपत्तियों पर व्यक्तिगत सुनवाई हो। कुछ किसानों ने यह भी कहा कि पश्चिमी रिंग रोड पहले से मौजूद है, ऐसे में पूर्वी रिंग रोड की आवश्यकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।

वहीं प्रशासन की ओर से एडीएम रोशन राय ने बताया कि पिछले छह महीनों से किसानों से संवाद जारी है। अलाइनमेंट में बदलाव और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है और समाधान का प्रयास किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे