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78 साल बाद भी श्मशान के लिए तरस रहा बघरोली, कीचड़ और नदी पार कर निकली शवयात्रा का वीडियो वायरल

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78 साल बाद भी श्मशान के लिए तरस रहा बघरोली, कीचड़ और नदी पार कर निकली शवयात्रा का वीडियो वायरल


मुरैना, 30 जुलाई (हि.स.)। आजादी के 78 वर्ष बाद भी मुरैना जिले के कैलारस जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बघरोली में ग्रामीणों को मुक्तिधाम जैसी मूलभूत सुविधा नसीब नहीं हो सकी है। गांव में श्मशान स्थल और वहां तक पहुंचने के लिए मार्ग नहीं होने के कारण लोगों को आज भी अपने परिजनों का अंतिम संस्कार खुले स्थान पर करना पड़ रहा है। हाल ही में एक वृद्ध महिला की शवयात्रा कीचड़ और नदी पार कर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत मुख्यालय बघरोली में आज तक मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हुआ है। श्मशान स्थल तक पहुंचने के लिए न कच्चा मार्ग है और न ही पक्का रास्ता। बरसात के दौरान सुख नदी में पानी बढ़ जाने से शवयात्रा निकालना और अधिक कठिन हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को शव को कंधों पर उठाकर कीचड़, पगडंडियों और नदी पार कर अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाना पड़ता है।

बताया गया है कि कुछ दिन पूर्व गांव की वृद्ध महिला कंबोदा राठोर का निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के लिए निकली शवयात्रा को दुर्गम रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। रास्ते में कीचड़ और फिसलन के कारण शवयात्रा में शामिल लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान बनाए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गांव में मुक्तिधाम और मार्ग निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम और वहां तक पहुंचने के लिए सड़क निर्माण की मांग वर्षों से जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखी जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भी इसी दुर्गम मार्ग से आवागमन करना पड़ता है। यदि शीघ्र व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में न तो मुक्तिधाम है और न ही वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमलेश कुमार भार्गव ने कहा कि जिले के सभी गांवों में मुक्तिधाम स्वीकृत और निर्मित हैं। यदि बघरोली में खुले में अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आई है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी निजी भूमि पर भी अंतिम संस्कार कर लेते हैं। यदि कहीं सुविधा का अभाव या अन्य कारण सामने आता है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा