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भाजपा ने आपातकाल की बरसी पर मनाया ‘काला दिवस’, लोकतंत्र सेनानियों का किया सम्मान

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भाजपा ने आपातकाल की बरसी पर मनाया ‘काला दिवस’, लोकतंत्र सेनानियों का किया सम्मान


छिंदवाड़ा, 25 जून (हि.स.)।भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय छिंदवाड़ा में बुधवार को 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की बरसी को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर किए गए प्रहार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन को याद करते हुए लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी रमेश पोफली, ईश्वरी प्रसाद चौरसिया, अशोक पोपली, ठाकुर दौलत सिंह, मोहन रोडे, मधुकरराव पोफली, राजेंद्र राय, दीनदयाल मोहन, चिवल यादव, आत्माराम तथा भाग्येश अल्डक को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के प्रत्यक्षदर्शियों और मीसा बंदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए उस दौर की परिस्थितियों को याद किया।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शुक्ला ने आपातकाल के दिनों की स्मृतियों को विस्तार से साझा किया। वर्ष 1960 से 1988 तक छिंदवाड़ा में प्रचारक के रूप में कार्यरत रहे श्री शुक्ला स्वयं भी आपातकाल के दौरान जेल में रहे थे। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा का समय था, जब राजनीतिक विरोध को दबाने के साथ-साथ आम नागरिकों की आवाज को भी कुचलने का प्रयास किया गया। हजारों लोगों को बिना किसी अपराध के जेलों में बंद किया गया और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ।

उन्होंने कहा कि जेलों में बंद लोगों ने अनेक यातनाएं और कठिनाइयां झेलीं, लेकिन लोकतंत्र और राष्ट्रहित के प्रति उनकी आस्था कभी कमजोर नहीं हुई। श्री शुक्ला ने नई पीढ़ी को लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल संविधान की व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और विश्वास का परिणाम है।

सांसद विवेक बंटी साहू ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर लगा एक ऐसा कलंक है, जिसने देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को गहरा आघात पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और राजनीतिक विरोध को दबाने का प्रयास हुआ। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश पुनः लोकतांत्रिक मार्ग पर लौट सका।

भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कहा कि आपातकाल सत्ता के अहंकार का प्रतीक था, जब संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि देश की आत्मा है और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहे।

वक्ताओं ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक स्वतंत्रताओं और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के प्रति समाज हमेशा जागरूक बना रहे।

कार्यक्रम के अंत में लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए लोकतंत्र की मजबूती का सामूहिक संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला संयोजक एवं जिला महामंत्री विजय पांडे ने किया, जबकि सहसंयोजक धर्मेंद्र मिगलानी ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर अमरवाड़ा विधायक कमलेश प्रताप शाह, पूर्व विधायक नत्थनशाह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ज्योति डेहरिया सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / sandeep chowhan