मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से बिजली महंगी, नए वित्तीय वर्ष में लागू होगा नया टैरिफ
भोपाल, 31 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत आम बिजली उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का झटका लेकर आ रही है। एक अप्रैल से प्रदेश में बिजली दरों में औसतन 4.80 प्रतिशत की वृद्धि लागू होने जा रही है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
नई टैरिफ व्यवस्था के अनुसार, सरकार और आयोग ने सीमित खपत करने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है। 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह राहत मिलती रहेगी, जिससे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका असर कम पड़ेगा। हालांकि, 150 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में बढ़ोतरी साफ तौर पर दिखाई देगी।
विशेष रूप से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल में औसतन 150 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर शहरी क्षेत्रों के मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा, जहां बिजली की खपत अपेक्षाकृत अधिक रहती है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह बढ़ोतरी घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती है।
इस बार टैरिफ में ‘टाइम ऑफ डे’ (टीओडी) व्यवस्था को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसके तहत शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक के पीक ऑवर्स में बिजली उपयोग करना महंगा पड़ेगा। अनुमान है कि इस अवधि में बिजली खर्च करने पर बिल में 10 से 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं दिन के समय बिजली का उपयोग अपेक्षाकृत सस्ता रहेगा, जिससे उपभोक्ताओं को अपने उपयोग के पैटर्न में बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बिजली दरों में यह बढ़ोतरी उत्पादन लागत में वृद्धि, कोयले की कीमतों में उछाल और वितरण कंपनियों के बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए की गई है। बिजली कंपनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने 10.19 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। उनका तर्क था कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें करीब 6,044 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। हालांकि आयोग ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए इस प्रस्ताव को कम कर 4.80 प्रतिशत वृद्धि तक सीमित रखा।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि ग्रामीण और गरीब वर्ग पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। 100 यूनिट तक की खपत पर सब्सिडी और राहत योजनाएं जारी रहेंगी। वहीं किसानों के लिए भी बिजली दरों में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है, जिससे कृषि क्षेत्र को राहत मिली है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

