डॉ. निवेदिता शर्मा ने मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया
- बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया
भोपाल, 08 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शुक्रवार को आखिरकार सात माह बाद नया नेतृत्व मिल गया। डॉ. निवेदिता शर्मा ने आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण समारोह के दौरान आयोग के अधिकारी-कर्मचारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर पूरे आयोग परिसर में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल दिखाई दिया। डॉ. शर्मा के नेतृत्व से बाल अधिकारों के क्षेत्र में नई सक्रियता और संवेदनशील कार्यशैली की उम्मीद जताई जा रही है।
पदभार ग्रहण करते ही अधिकारियों की बैठक, दिए महत्वपूर्ण निर्देश
कार्यभार संभालने के तुरंत बाद डॉ. निवेदिता शर्मा ने आयोग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अलग-अलग और सामूहिक बैठकें लीं। बैठक के दौरान उन्होंने बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण, शिकायतों की गंभीरता से जांच तथा आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि पिछले सात महीनों में आयोग को 100 से अधिक नई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें बाल शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, शिक्षा से वंचित बच्चों तथा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मामले शामिल हैं। इसके अलावा कई पुराने मामलों का निराकरण भी लंबित है। डॉ. शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और पीड़ित बच्चों को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।
बाल श्रम और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर सख्त कार्रवाई के संकेत
डॉ. निवेदिता शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाल श्रम, बाल विवाह और बाल शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आयोग पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार जागरूकता के अभाव में बच्चों के अधिकारों का हनन होता है, इसलिए आयोग सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, वह प्रभावी परिणामों के लिए कार्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज और प्रशासन दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
छात्रावासों और विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की होगी नियमित समीक्षा
नवनियुक्त अध्यक्ष ने कहा कि आयोग प्रदेश के छात्रावासों, विद्यालयों एवं बच्चों से जुड़े अन्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करेगा। उन्होंने संकेत दिए कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. शर्मा ने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होगा कार्य
डॉ. निवेदिता शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जाएगा।वहीं, उनका कहना यह भी रहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का निपटारा करना नहीं है, बच्चों के हित में दीर्घकालिक और प्रभावी व्यवस्था विकसित करना भी है। इसके लिए आयोग प्रशासनिक स्तर पर भी सुधारात्मक कदम उठाएगा, ताकि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके।
सामाजिक संगठनों ने जताया विश्वास
इस अवसर पर उपस्थित सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने डॉ. निवेदिता शर्मा को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में आयोग बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाएगा। उपस्थित लोगों का मानना था कि डॉ. शर्मा का प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक सरोकार बच्चों से जुड़े मुद्दों के समाधान में नई दिशा देगा।
उल्लेखनीय है कि डॉ. निवेदिता शर्मा अपने पूर्व सदस्य के कार्यकाल के दौरान में बालकों के हित में कार्य करने के लिए बहुत सक्रिय रहीं, जिसके कारण प्रदेश सरकार ने उन्हें अध्यक्ष के रूप में इस बार बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। जिस तरह उन्होंने पहले ही दिन लंबित मामलों की समीक्षा कर अधिकारियों को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए, उससे स्पष्ट है कि आयोग आने वाले समय में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

