अक्षय तृतीया पर दान, पुण्य और पूजा करना अत्यंत फलदायी : पंडित सुनील शर्मा
सीहोर, 14 अप्रैल (हि.स.)। जगत पालक भगवान विष्णु के छठे अवतार व भगवान शिव शक्ति के परम शिष्य चिरंजीवी भगवान परशुरामजी का जन्मोत्सव वैसाख मास शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया को बड़े ही उत्साह व उमंग से मनाया जाएगा। इस बार तृतीया तिथि 19 अप्रैल रविवार दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से प्रारम्भ होकर 20 अप्रैल सोमवार सुबह 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगी ।
अक्षय तृतीया का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इस पावन अवसर पर दान, पुण्य और भगवान की पूजा-अर्चना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शास्त्रों में वर्णन है कि इस सृष्टि में सात चिरंजीवी है जो कि आज भी जीवित है और इस सृष्टि में निवास करते हैं। अश्वत्थामा, राजा बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमानजी, विभीषण, कृपाचार्य और परशुरामजी सप्त चिरंजीवी हैं जो की अजर अमर है । शास्त्र अनुसार त्रेता युग में महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के आश्रम में भगवान परशुराम का जन्म हुआ था । इंदौर महू के पास जानापाव कुटी उनकी जन्मस्थली है ।
परशु धारण करने से कहलाए भगवान परशुराम -
भगवान परशुरामजी का बचपन का मूल नाम राम था उन्होंने भगवान शंकर की कठोर तपस्या की तब भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य अस्त्र परशु फरसा प्रदान किया तभी से भगवान का नाम परशुराम हो गया । भगवान परशुरामजी ने इस भूधरा पर 21 बार अत्याचारी राजाओं का विध्वंस कर धर्म ध्वजा की स्थापना की। भगवान परशुरामजी शस्त्र और शास्त्र का समन्वय है वह अजय योद्धा है। चिरंजीवी भगवान परशुराम ने त्रेता युग में भगवान श्रीराम को धनुष और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया। उन्होंने पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, और दानवीर कर्ण को शिक्षा प्रदान की।
अक्षय तृतीया एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त -
शास्त्र अनुसार वैशाख मास अक्षय तृतीया को अबुझ मुहूर्त माना गया है जो की एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। इस दिन कोई भी नवीन कार्य विवाह, गृह प्रवेश,नवीन व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अक्षय तृतीया पर किया गया जप तप हवन पूजा पाठ दान का फल अक्षय होता है। अक्षय तृतीया पर शुभ कार्य व दान पुण्य पुण्यकारी होता है। अक्षय तृतीया से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है व घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है इस दिन सत्तू, गुड, घी, शीतल जल, वस्त्र, छाता, फल, अन्न दान करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

