home page

अनूपपुर: दिवाली के उत्साह के कारण आंखों की सुरक्षा को नजर अंदाज न करे- नेत्र विशेषज्ञ डॉ जनक सारीवान

 | 
अनूपपुर: दिवाली के उत्साह के कारण आंखों की सुरक्षा को नजर अंदाज न करे- नेत्र विशेषज्ञ डॉ जनक सारीवान


अनूपपुर, 07 नवंबर (हि.स.)। दीपों से घर को जगमगाने वाली दीपावली सबसे लोकप्रिय और प्रकाश का पर्व है,जो खुशियों, उमंग, उत्साह और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। लेकिन दिवाली के उत्साह के कारण हम अपनी आंखों की सुरक्षा को नजर अंदाज न करे। दीपावली में पटाखों और खिलौनों जैसे कार्बाइड गन के कारण होने वाली घटनाएं आंखों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।

शनिवार को अनूपपुर जिला चिकित्सालय में पदस्थ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ जनक सारीवान ने बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार से विषेश चर्चा में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आजकल पटाखों के साथ साथ कार्बाइड गन बच्चों को आकर्षित कर रहा है जो देखने में सामान्य खिलौने जैसी लग सकती है लेकिन वास्तव में यह खतरनाक विस्फोटक उपकरण है जिसके विस्फोट से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। आंखों की पुतली (कॉर्निया) जल सकती है जो इसकी पारदर्शिता को नष्ट कर स्थाई रूप से नज़र को कम कर सकती है,आंखों के अंदर रक्तस्राव हो सकता है,आंखों की रेटिना या पर्दा में गंभीर चोट पहुंच सकती है जो नजर को स्थाई रूप से कम कर सकता है,चोट के कारण मोतियाबिंद बन सकता है,आंखों के जलने से पुतली को पारदर्शी बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो सकती है जो आँखो को हमेशा के लिए अंधा बना सकती हैं।

उन्होंने कहा है कि कार्बाइड गन का उपयोग बिल्कुल न करें,पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलाएं,पटाखे जलाते समय प्रोटेक्टिव ग्लास का उपयोग करें,पटाखे जलते समय दूरी बनाएं,जले हुए या खराब पटाखे दोबारा न जलाएं, यदि पटाखे या कार्बाइड गन के विस्फोट से आंखों को चोट लग जाए तो आंखों को बिल्कुल न रगड़ें, आंखों को साफ बहते पानी में 20-30 मिनट के लिए धोएं।, आंखों में फंसे कण को स्वयं निकालने का प्रयास न करें, बिना चिकित्सक के सलाह के कोई आई ड्रॉप्स या घरेलू उपचार न करें। तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें भले शुरूआत में दृष्टि सामान्य हो।

दीपावली प्रकाश का त्यौहार है अंधकार का नहीं। इस पर्व पर हम अपने घरों को दीपों से रौशन करें न कि खुद और किसी दूसरों को अंधकार में धकेले,आँखे हमारे शरीर का अनमोल अंग है जिसके बिना जीवन की सुंदरता,प्रकृति के रंग और अपनो के चेहरे देख पाना असंभव है!हमारी थोड़ी सी सावधानी जिंदगी की रौशनी बचा सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला