सागर: दिव्यांग शिक्षिका की जीत, मप्र उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सेवा में पुनः बहाली
सागर, 11 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक (कन्या) विद्यालय, गौरझामर में पदस्थ उच्च माध्यमिक शिक्षक राजकुमारी लोधी को मप्र उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ) से बहुत बड़ी राहत मिली है।
लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा त्रुटिपूर्ण विकलांगता प्रमाण-पत्र को आधार बनाकर जारी किए गए बर्खास्तगी आदेश पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। न्यायालय के इस स्थगन आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मंगलवार को शिक्षिका को पुनः शाला में कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है।
आर्थिक तंगी और शारीरिक असमर्थता के बीच आया था बर्खास्तगी का आदेश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिक्षिका राजकुमारी लोधी अत्यंत कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही हैं और शारीरिक रूप से चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 22 जून 2026 को एक आदेश जारी कर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। अचानक हुए इस फैसले के बाद पीड़िता ने कर्मचारी और शिक्षक संगठनों से संपर्क साधा। उन्होंने अपनी व्यथा मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश मंत्री राकेश श्रीवास्तव, राज्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष अरुण कुमार दुबे तथा मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रतिनिधि भरत सिंह राजपूत के समक्ष रखी।
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। शिक्षिका को न्याय दिलाने के संकल्प के साथ जबलपुर उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की गई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. गिडियाल एवं अधिवक्ता शिवम मिश्रा ने शिक्षिका का पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। तर्कों को सुनने के उपरांत, उच्च न्यायालय ने 22 जून 2026 के बर्खास्तगी आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी और शिक्षिका के पक्ष में स्थगन आदेश जारी किया।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राजकुमारी लोधी ने लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात, जिला शिक्षा अधिकारी (सागर) अरविंद जैन ने 11 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर राजकुमारी लोधी (पति धनपाल सिंह लोधी) को गौरझामर स्थित कन्या विद्यालय में पुनः कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी।
इस सफलता पर कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि विषम परिस्थितियों से जूझ रही एक दिव्यांग महिला शिक्षक की मदद करना संगठन का नैतिक दायित्व था। न्यायालय के इस निर्णय से संगठन के कार्यकर्ताओं में हर्ष की लहर है। पदाधिकारियों ने दोहराया कि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय होने पर संगठन हमेशा उनके अधिकारों के लिए तत्पर रहेगा।
पुनः सेवा में बहाल होने पर शिक्षिका राजकुमारी लोधी ने इस कठिन दौर में संबल प्रदान करने के लिए मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा जिला शिक्षा अधिकारी का हृदय से आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

