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अनूपपुर: छात्राओं को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर डाला फेक अश्लील वीडियो

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अनूपपुर: छात्राओं को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर डाला फेक अश्लील वीडियो


अनूपपुर, 10 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग और पुलिसिया संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय की दो छात्राओं को बदनाम करने के लिए उनकी पूर्व रूममेट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उनकी तस्वीरों को एडिट कर अश्लील वीडियो बना फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए यूनिवर्सिटी ग्रुप्स में वायरल कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि पीड़ित छात्राएं दो महीने तक न्याय के लिए भटकती रहीं, लेकिन स्थानीय पुलिस ने आज तक प्रकरण दर्ज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। आखिरकार शहडोल संभागायुक्त,पुलिस उप महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद बुधवार को प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

पीड़ित छात्राओं ने बताया कि वे अमरकंटक की विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं। हॉस्टल में कमरा नहीं मिलने के कारण उन्होंने कैंपस के बाहर एक तीसरी लड़की के साथ शेयरिंग रूम लिया था। वह लड़की समय पर किराया नहीं देती थी। करीब दो महीने पहले वह लड़की बिना बताए अपना सामान समेट कर रूम छोड़कर जाने लगी। जब पीड़ित छात्राओं ने मकान मालिक को बुलाकर उसे रोका तो वह झगड़ा करने लगी। जाते-जाते उसने धमकी दी- मैं जब तक तुम दोनों को बदनाम नहीं करा दूंगी, तब तक चैन से नहीं रहूंगी। धमकी के कुछ दिनों बाद ही पीड़ित छात्राओं के पास परिचितों के फोन आने लगे। जांच करने पर पता चला कि सोशल मीडिया पर उनके नाम से फर्जी अकाउंट्स बनाए गए हैं।

पीड़ित छात्राओं के अनुसार हमारी पूर्व रूममेट और उसका भाई एआई की मदद से हमारे अश्लील वीडियो एडिट कर विश्वविद्यालय के ग्रुप और हमसे जुड़े लोगों को भेजने लगे। जब हमने उस लड़की से बात की तो उसने स्वीकार किया कि वह अपने भाई के साथ मिलकर हमें बदनाम करने के लिए यह सब कर रही है। हमने उसकी मां से भी शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। छात्राओं का आरोप है कि इस मानसिक प्रताड़ना के बीच उन्होंने पुलिस से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें सिर्फ तारीखें और दिलासा मिली।

7 अप्रैल: छात्राएं अश्लील कंटेंट के सबूत लेकर अमरकंटक थाने पहुंचीं। पुलिस ने उन्हें 2 घंटे बिठाया और कहा- यह हमारा मामला नहीं है। साइबर सेल जाओ और बिना एफआईआर लिखे लौटा दिया।

8 अप्रैल: अश्लील पोस्ट लगातार बढ़ रहे थे। छात्राएं दोबारा थाने गईं और 5 घंटे बैठी रहीं। उन्होंने संदिग्धों के नाम, पते और मोबाइल नंबर भी दिए, लेकिन पुलिस ने कहा- हम उन्हें कैसे पकड़ें? यह काम तो साइबर सेल वालों का है।

47 दिन बाद 24 मई को पीड़ित छात्राएं दोबारा थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दी, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच उन्होंने सीएम हेल्पलाइन (29 मई) पर भी शिकायत की, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद पूरी तरह टूट चुकीं छात्राएं हार मानकर विश्वविद्यालय छोड़ अपने घर लौट आईं। और शहडोल में वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाने पहुंचीं।

छात्राओं ने शहडोल संभागायुक्त से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई। जिसे गंभीरता से लेते हुए उन्हें पुलिस उप महानिरीक्षक के पास भेजा। पुलिस उप महानिरीक्षक ने तुरंत अमरकंटक पुलिस को फोन कर फटकार लगाई, जिसके बाद आज दिन छात्राओं के फोन पर एफआईआर दर्ज होने का मैसेज आया। हालांकि, छात्राओं का कहना है कि उन्हें एफआईआर की कॉपी अब तक नहीं दी गई है।

आरोपी नहीं पकड़े जाते तब तक नहीं जाएंगे विश्वविद्यालय

इस पूरे खौफनाक दौर में छात्राओं के माता-पिता उनके साथ ढाल बनकर खड़े रहे। छात्राओं ने कहा- हमारे माता-पिता ने हिम्मत दी कि तुम गलत नहीं हो, हम साथ हैं, अगर उनका साथ न होता, तो शायद हम कोई गलत कदम उठा लेते। पीड़ितों ने साफ कर दिया है कि वह दो महीने से घर पर ही हैं। जब तक पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती और इंटरनेट से उनके नाम की फेक अकाउंट व अश्लील वीडियो पूरी तरह डिलीट नहीं हो जाते, तब तक वे विश्वविद्यालय कदम नहीं रखेंगी। उनके इस फैसले में परिवार भी उनके साथ है।

पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब ने बताया दो छात्रओं ने शिकायत की थी जिसके बाद मेरे संज्ञान में आने के पर मामला पंजीबद्ध किया गया जांच के बाद कार्यवाई की जायेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला