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अनूपपुर: विस्थापितों ने जेएमएस माइनिंग कंपनी पर लगाए शोषण, धमकी और वादाखिलाफी के आरोप

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अनूपपुर: विस्थापितों ने जेएमएस माइनिंग कंपनी पर लगाए शोषण, धमकी और वादाखिलाफी के आरोप


अनूपपुर: विस्थापितों ने जेएमएस माइनिंग कंपनी पर लगाए शोषण, धमकी और वादाखिलाफी के आरोप


अनूपपुर, 26 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की जेएमएस माइनिंग कंपनी द्वारा उरतान एवं उरतन नॉर्थ कोल माइंस परियोजना (ग्राम बसखला वा ठोडहा) के खिलाफ स्थानीय विस्थापित आदिवासी किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। कंपनी पर स्थानीय भूमिपुत्र कर्मचारियों के साथ शोषण, रोजगार में भेदभाव, लिखित समझौते से मुकरने और आंदोलन दबाने के लिए धमकियां देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

प्रभावित ग्रामीणों और कर्मचारियों ने कलेक्टर अनूपपुर, पुनर्वास एवं व्यवस्थापन समिति तथा प्रशासन को जनसुनवाई में मंगलवार को शिकायती पत्र देते हुए तत्काल मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 27 मई से कंपनी गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना, काम बंद आंदोलन और व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

जमीन हमारी, मुनाफा कंपनी का, लेकिन रोजगार नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022-23 में उरतान एवं उरतान नॉर्थ कोल माइंस परियोजना के लिए उनकी उपजाऊ जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय कंपनी प्रबंधन और आरआर नीति के तहत विस्थापित परिवारों को स्थायी रोजगार, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। विस्थापित परिवारों का कहना है कि कंपनी स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को रोजगार दे रही है। जिन किसानों ने अपनी जमीन दी, उन्हीं के परिवार आज रोजगार और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन पर करोड़ों रुपये का कोयला उत्पादन हो रहा है, लेकिन विस्थापितों को न तो स्थायी रोजगार मिल रहा है और न ही सुरक्षित कार्य वातावरण। इससे क्षेत्र में गहरा असंतोष फैल गया है।

लिखित समझौते से पीछे हटने का आरोप

कर्मचारियों के अनुसार 24 मार्च को कंपनी प्रबंधन को मांगों से संबंधित लिखित ज्ञापन सौंपा गया था। लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिलने पर 3 मई को कंपनी परिसर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि इसके बाद हुई बैठक में कंपनी प्रबंधन ने सात दिनों के भीतर भर्ती, सुरक्षा और वेतन संबंधी मुद्दों पर लिखित जवाब देने का आश्वासन दिया था। बैठक की एमओएम पर हस्ताक्षर भी किए गए, लेकिन बाद में कंपनी अपने वादों से पीछे हट गई। इस कथित वादाखिलाफी से कर्मचारियों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि कंपनी लगातार समय निकालकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

प्रशासन तक पहुंचा मामला, एसडीएम ने मांगा जवाब

मामला बढ़ने पर आंदोलनकारियों ने 18 मई को एसडीएम कोतमा को शिकायत सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद प्रशासन ने 22 मई को कंपनी प्रबंधन को निर्देश जारी कर 27 मई तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद कंपनी का रवैया नहीं बदला और आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।

ईएसएमए लगाने और नौकरी से निकालने की धमकी का आरोप

ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि कंपनी ने 25 मई को एक अनौपचारिक नोटिस जारी कर कर्मचारियों को ईएसएमए लगाने, नौकरी से निकालने, निलंबित करने और वेतन काटने जैसी धमकियां दी हैं। ग्रामीणों और मजदूर नेताओं ने इसे मानसिक और आर्थिक शोषण करार देते हुए कहा कि कंपनी आंदोलन की आवाज दबाने के लिए भय का माहौल बना रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि गरीब आदिवासी और विस्थापित मजदूरों को डराकर उनके संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

27 मई से बड़ा आंदोलन, खदान गेट पर होगा धरना

आंदोलनकारी संगठनों ने ऐलान किया है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 27 मई की सुबह से कंपनी गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही काम बंद आंदोलन भी किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल नौकरी की नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन और सम्मान की है। आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी किसान, मजदूर और विस्थापित परिवार शामिल हो सकते हैं।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन और आरआर कमेटी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही विस्थापित परिवारों को रोजगार, वेतन पुनरीक्षण, वैधानिक भत्ते, सुरक्षा और आरआर नीति के तहत मिलने वाले सभी अधिकार सुनिश्चित करने की अपील की है। ज्ञापन में कहा गया है कि जिला प्रशासन स्थानीय भूमिदाताओं और विस्थापित परिवारों के हितों की रक्षा करे तथा कंपनी द्वारा कथित आर्थिक दमन और धमकी की नीति पर तत्काल रोक लगाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से उम्मीद जताई है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनके हक एवं सम्मान की रक्षा की जाएगी।

जनसुनवाई में 73 आवेदन पत्रों में की सुनवाई

जनसुनवाई में अपर कलेक्टर दिलीप कुमार पाण्डेय ने 73 आवेदनों पर जनसुनवाई करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में डिप्टी कलेक्टर कमलेश पुरी, डिप्टी कलेक्टर प्राशी अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनी।

जनसुनवाई के दौरान तहसील कोतमा के ग्राम बुढ़ानपुर निवासी राजेश सोनी ने मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना का लाभ दिलाए जाने, तहसील कोतमा के ग्राम राजाकछार निवासी इन्द्रवती महरा ने सीमांकन कराए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम पगना निवासी लौंगी बाई चौधरी ने वृद्धावस्था पेंशन दिलाए जाने, तहसील जैतहरी के ग्राम मनिकपुर निवासी कमलेश राठौर ने नक्शा तरमीम कराए जाने के संबंध में आवेदन दिए। इसके अतिरिक्त अन्य आवेदकों द्वारा जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने, खसरे में सुधार किए जाने, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रदान किए जाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला