अनूपपुर: तीसरे श्रावण सोमवार और नागपंचमी पर अमरकंटक में उमड़े भक्त
अनूपपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। पवित्र श्रावण मास के तृतीय सोमवार एवं श्रावण शुक्ल पंचमी, नाग पंचमी के पावन संयोग पर आदितीर्थ अमरकंटक में सोमवार को आस्था, भक्ति और शिव आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिवभक्त और श्रद्धालु मां नर्मदा के पावन तट पर पहुंचे।
अनुमान के अनुसार शाम तक लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने अमरकंटक पहुंचकर नर्मदा स्नान, ध्यान, दर्शन-पूजन तथा भगवान ज्वालेश्वर महादेव के जलाभिषेक का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। तीसरा सोमवार शिवभक्तों के लिए खास माना जा रहा है। इसका प्रमुख कारण एक अद्भुत संयोग है। लगभग डेढ़ दशक बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है कि श्रावण सोमवार और नागपंचमी भी पड़ी है। भोलेनाथ को समर्पित है और पंचमी तिथि नाग देवता को। ऐसे में श्रद्धालु भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी विधि विधान से पूजा अर्चना करेंगे। एक ही दिन दोनों का होना बहुत शुभदायी माना गया है।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मॉ नर्मदा उद्गम अमरकंटक के अमरेश्वर भगवान शिव की तपस्या स्थली भगवान शिव की पूजा अर्चना और उनको प्रसन्न करने का पवित्र सावन के तीसरे सोमवार पर शिवालयों में भक्तों का तांता लगा है। यहां देश प्रदेश से बड़ी संख्या में भक्त शिवालय में शिव पूजा अर्चना करने पहुंचा रहे है। अनूपपुर जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी मध्यप्रदेश -छत्तीसगढ़ सीम पर बसी पवित्र नगरी अमरकंटक के जंगलों में प्राकृतिक शिवलिंग अमरेश्वर महादेव' स्थित है। यहां न सिर्फ छत्तीसगढ़ से, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन के महीने में इस मंदिर में भारी भीड़ होती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, सुबह से लोग मंदिर पहुंच भगवान शंकर को जल चढ़ाया।
सावन का सोमवार व्रत भगवान शिव पूजा के लिए विशेषकारी माना जाता है। पंचांग के अनुसार, सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हो गई है। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार व्रत करने से व्यक्ति की हर मनचाही इच्छा पूरी होती है। देवों के देव महादेव को सावन का महीना सबसे प्रिय है। इस पूरे महीने में शिव जी और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।
सावन के तीसरे सोमवार 17 अगस्त को अनूपपुर जिले भर के शिव मंदिरों में शिवभक्तों ने सुबह से हीं भ्रगवान शिव का अभिषेक किया। साथ लोगों के मंदिरों के साथ अपने –अपने घरों में पूजा में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव पूजन को विशेष पूजा अर्चना कर शिव को प्रसन्न करने का प्रयास किया। माना जाता हैं कि भगवान शिव का अभिषेक करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
अमरकंटक में तड़के लगभग 3 बजे से ही नर्मदा स्नान, दर्शन, पूजन-अर्चन एवं अभिषेक का क्रम प्रारंभ हो गया था। जैसे-जैसे सुबह हुई, नर्मदा उद्गम क्षेत्र, रामघाट, कोटि तीर्थ घाट और ज्वालेश्वर धाम की ओर श्रद्धालुओं का सैलाब बढ़ता गया। चारों ओर भगवा वस्त्रों में कांवड़िए, हाथों में नर्मदा जल और कंठ में शिवनाम का जाप करते श्रद्धालु दिखाई दिए। वहीं नर्मदा मंदिर में दर्शनार्थियों की लाईन प्रंगण के बाहर लगी हैं। जालेश्वर धाम में भी शिव दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों की लम्बी कतार लगी रही। अमरकंटक और जालेश्वर धाम के बीच 8 किलोमीटर के फासले में जगह जगह कांवडिय़ों का जत्था हर-हर महादेव की जयघोष करते हुए आगे बढ़ता नजर आया। शिवभक्त की जयघोष से नर्मदा नगरी हर हर महादेव से गुजांयमान है, मानों शिव साक्षात अमरकंटक में प्रकट हो। भक्त भींगते हुए नर्मदा दर्शन के साथ जलाभिषेक के लिए जालेश्वर प्रस्थान कर रहे हैं।
इसके अलावा माई की बगिया, सोनमूडा सहित अन्य दर्शनीय स्थलों पर भी सैलानियों की भीड़ उमड़ी रही। ऐसी मान्यता है अमरकंटक के जलेश्वर और अमरेश्वर में पूजा अर्चना के लोगो की मान्यताएं पूर्ण होती है। अमरकंट कई ऋषि-मुनियों की तप-स्थली होने के साथ ही यह स्थल आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से बहुत ही सुंदर और मनोरम है। अमरकंटक का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थल महत्वपूर्ण है। श्रावण शुक्ल पंचमी और नाग पंचमी के पावन पर्व के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक रही। नर्मदा स्नान एवं पूजन के साथ नाग पंचमी के धार्मिक महत्व को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
पुलिस ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए अमरकंटक के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात रहा। ज्वालेश्वर धाम में छत्तीसगढ़ पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में लगी रही, वहीं पवित्र नगरी के रामघाट, कोटि तीर्थ घाट, मां नर्मदा मंदिर एवं ज्वालेश्वर तिराहा सहित प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था बनाए रखने में सेवाएं दी गईं। भीड़ को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित करने, श्रद्धालुओं को कतारबद्ध रखने तथा आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस एवं सुरक्षा कर्मी लगातार सक्रिय रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

