अनूपपुर: नर्मदा परिक्रमा करते अमरकंटक पहुंचा शिरडी का 40 सदस्यीय भक्त दल
अनूपपुर, 21 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मॉ नर्मदाकी उद्गम स्थली अमरकंटक आस्था, विश्वास और भक्ति की अविरल धारा में नर्मदा परिक्रमा करते हुए महाराष्ट्र के शिरडी से 40 सदस्यीय भक्त मंडल पहुंचा।
यह यात्रा ओंकारेश्वर से आरंभ होकर दसवें दिन शनिवार को अमरकंटक पहुंच मां नर्मदा के उद्गम स्थल की गोद में आकर भाव-विभोर हो उठे। जहां परिक्रमावासियों ने रामघाट के पवित्र तट पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं आरती की। इसके पश्चात मां नर्मदा उद्गम मंदिर के उत्तर तट पर पहुंचकर पूर्ण आस्था और समर्पण के साथ दर्शन-पूजन किया। वातावरण “नर्मदे हर” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा, मानो स्वयं प्रकृति भी इस भक्ति में सहभागी हो।
परिक्रमावासी अमरकंटक के रमणीय स्थलों का भ्रमण कर यहां की सुरम्य वादियों, हरित आंचल और अलौकिक छटा का रसास्वादन किया। उन्होंने बताया कि जहां देश के अन्य हिस्सों में गर्मी ने दस्तक दे दी है, वहीं अमरकंटक आज भी अपनी शीतलता और सौम्यता से मन को शांति प्रदान कर रहा है। यहां का वातावरण मानो तपती जीवन-धारा पर शीतल स्पर्श सा प्रतीत होता है।
परिक्रमावासी अनुभव साझा करते हुए कहा कि अमरकंटक के विषय में जो सुना था, यहां आकर वह सजीव अनुभूति में परिवर्तित हो गया। नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण और ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतित-पावनी मां नर्मदा अपने प्रत्येक भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और उनके दर्शन किसी न किसी रूप में अवश्य कराती हैं। भावुक स्वर में कहा कि परिक्रमा पथ पर कठिनाइयां भले ही आती हों, पर मां नर्मदा की कृपा ऐसी है कि कोई भी भक्त भूखा नहीं सोता। यह यात्रा त्याग, तप और विश्वास की जीवंत मिसाल है। महाराष्ट्र सहित देशभर के श्रद्धालु मां नर्मदा के दर्शन, पूजन और परिक्रमा के लिए सदैव लालायित रहते हैं। वास्तव में, कलयुग में मां नर्मदा की महिमा अद्वितीय और अपरंपार है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

