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दमोह: कलेक्टर ने की राजस्व मामलों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

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दमोह: कलेक्टर ने की राजस्व मामलों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश


दमोह: कलेक्टर ने की राजस्व मामलों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश


दमोह, 11 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में राजस्व संबंधी शिकायतों की बढ़ती संख्या को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गुरुवार को राजस्व मामलों की समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए।

उन्होंने कहा कि सीमांकन, नामांतरण और अन्य राजस्व मामलों में जारी किए जाने वाले सभी आदेश स्पष्ट, गुणवत्तापूर्ण और “स्पीकिंग ऑर्डर” के रूप में होने चाहिए, ताकि किसान और भू-स्वामी निर्णय को आसानी से समझ सकें। बैठक में अपर कलेक्टर मीना मसराम सहित जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।

जनसुनवाई में सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व विभाग कीकलेक्टर यादव ने बताया कि जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित प्राप्त हो रही हैं। इनमें सीमांकन नहीं होने, गलत सीमांकन किए जाने, आदेशों की प्रतिलिपि उपलब्ध नहीं कराने तथा फील्ड बुक नहीं देने जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों के समाधान के लिए पूर्व में कई बार निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कई मामलों में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज निराकरण वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद आरसीएमएस पोर्टल पर अपलोड आदेशों की जांच कराई गई।

जांच में सामने आईं गंभीर खामियांकलेक्टर ने बताया कि जिले के 18 न्यायालयों के आदेशों का रैंडम परीक्षण कराया गया, जिसमें कई गंभीर त्रुटियां सामने आईं। कई मामलों में केवल प्रपत्र अपलोड किए गए थे जबकि आदेश संलग्न नहीं थे। कुछ प्रकरणों में गलत दस्तावेज अपलोड मिले और कई आवेदन मात्र दो पंक्तियों में निरस्त कर दिए गए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना पर्याप्त कारण और तथ्य दर्ज किए गए आदेश न केवल नियमों के विपरीत हैं, बल्कि इससे आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सीमांकन मामलों को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकताबैठक में प्रत्येक तहसील और न्यायालय के त्रुटिपूर्ण आदेशों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने भी कार्यप्रणाली में कमियां स्वीकार कीं। कलेक्टर ने सीमांकन मामलों की अलग से समीक्षा करते हुए सभी राजस्व निरीक्षकों से लंबित प्रकरणों की जानकारी ली और देरी के कारण पूछे। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी तथा किसी भी किसान या भू-स्वामी को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

रोवर मशीन का होगा अधिकतम उपयोगजिले में उपलब्ध करोड़ों रुपये मूल्य की आधुनिक रोवर मशीन के बेहद कम उपयोग पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि मशीन की क्षमता प्रतिदिन तीन से चार सीमांकन करने की है, लेकिन पूरे वर्ष में इसका उपयोग केवल सात मामलों में किया गया। अब सभी तहसीलों के लिए रोस्टर तैयार किया जाएगा और रोवर मशीन को एक-एक सप्ताह के लिए विभिन्न तहसीलों में भेजा जाएगा, जिससे लंबित सीमांकन प्रकरणों का तेजी से निपटारा किया जा सके।

“पहले आवेदन, पहले निराकरण” व्यवस्था होगी लागूकलेक्टर यादव ने निर्देश दिए कि सीमांकन और नामांतरण मामलों में अब “पहले आवेदन, पहले निराकरण” की व्यवस्था लागू की जाएगी। पुराने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा और किसी भी प्रकार की मनमानी नहीं होने दी जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रत्येक आदेश में तथ्यों, तर्कों और निर्णय का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए, जिससे संबंधित पक्षों को निर्णय समझने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

फील्ड विजिट बढ़ाएं अधिकारी, लापरवाही पर होगी कार्रवाईबैठक में कलेक्टर ने सभी एसडीएम को नियमित रूप से फील्ड विजिट करने, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, छात्रावासों और अन्य शासकीय संस्थानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही जनसुनवाई और हल्का निवारण शिविरों के प्रभावी संचालन पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि समय पर कार्य नहीं करने वाले पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों के खिलाफ प्रस्ताव तैयार कर कार्रवाई की जाएगी। तहसीलों और राजस्व कार्यालयों का लगातार निरीक्षण किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव