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दमोह: फर्जी डॉक्टर रैकेट का मास्टरमाइंड भोपाल से गिरफ्तार, नेटवर्क में 50 से अधिक शामिल होने की आशंका

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दमोह: फर्जी डॉक्टर रैकेट का मास्टरमाइंड भोपाल से गिरफ्तार, नेटवर्क में 50 से अधिक शामिल होने की आशंका


- पुलिस टीमें अलग-अलग जिलों में कर रही ताबड़तोड़ छापेमारी

दमोह, 21 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले एक बहुत बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दमोह पुलिस ने इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल को बुधवार देर शाम को भोपाल के कोहेफिजा इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

दमोह एसपी आनंद कलादगी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संजीवनी क्लिनिकों में फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने वाले डॉक्टरों की संख्या 50 से अधिक हो सकती है। गिरफ्तार मास्टरमाइंड हीरा सिंह ने पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े कई रसूखदारों और फर्जी डॉक्टरों के नामों का खुलासा किया है।

इस हाईप्रोफाइल मामले में मास्टरमाइंड सहित अब तक कुल 4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले पकड़े गए तीन कथित डॉक्टरों डॉ. कुमार सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और डॉ. अजय मौर्य को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो और दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी हीरा सिंह ने ही सबसे पहले अजय मौर्य की फर्जी डिग्री तैयार करवाई थी, जिसके बाद अजय के जरिए कुमार सचिन और राजपाल भी इस गिरोह में शामिल हुए।

8 से 10 लाख में खरीदीं डिग्रियां

इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें तब खुलीं जब दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या को एक गोपनीय शिकायत मिली। उन्होंने जब जांच करवाई तो मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। आरोपी राजपाल गौर ने साल 2018 के एक पुराने रजिस्ट्रेशन नंबर में हेरफेर कर उसे 2023 का बना लिया था। असल में वह रजिस्ट्रेशन नंबर नर्मदापुरम में पदस्थ असली डॉक्टर अभिषेक यादव का था।

पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि उन्होंने 8 से 10 लाख रुपये देकर एमबीबीएस की फर्जी डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) का जाली रजिस्ट्रेशन खरीदा था। इस खेल में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है, जिसकी जांच जारी है।

बीडीएस और बीएचएमएस पास थे आरोपी

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी सचिन यादव के पास बीडीएस (डेंटिस्ट) और राजपाल गौर के पास बीएचएमएस (होम्योपैथी) की असली डिग्री है, लेकिन वे एलोपैथिक डॉक्टर बनने के लिए फर्जी कागजातों के सहारे सरकारी सिस्टम में घुस गए। सचिन पिछले 5 महीने से और राजपाल पिछले 1 साल से दमोह के सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में सेवाएं दे रहे थे। वहीं, अजय मौर्य पिछले ढाई साल से जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में डॉक्टर बनकर बैठा था। सीएमएचओ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को पत्र लिखकर तत्काल इन जालसाजों की नियुक्ति रद्द करने की सिफारिश की है।

दमोह जिले के सभी डॉक्टरों के दस्तावेजों की होगी जांच

इस बड़े खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। दमोह के सभी नियमित, बॉन्ड वाले और एनएचएम के तहत काम कर रहे डॉक्टरों की डिग्रियों की री-वेरिफिकेशन कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पताल के 38, एनएचएम के 15 और ब्लॉक स्तर पर तैनात करीब 28 डॉक्टरों समेत कुल 81 डॉक्टरों के मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और डिग्रियों की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है, ताकि सिस्टम में छिपे अन्य 'मुन्नाभाइयों' को भी बेनकाब किया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की अलग-अलग टीमें अब भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, धार, मंडला और जबलपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत