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दमोह: कलेक्टर ने बुलाई गौशाला संचालकों की बैठक, अव्यवस्थाओं को लेकर दिखाई सख्ती

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दमोह: कलेक्टर ने बुलाई गौशाला संचालकों की बैठक, अव्यवस्थाओं को लेकर दिखाई सख्ती


दमोह: कलेक्टर ने बुलाई गौशाला संचालकों की बैठक, अव्यवस्थाओं को लेकर दिखाई सख्ती


दमोह, 25 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में संचालित गौशालाओं की अव्यवस्थाओं, सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गौवंश और गौसंरक्षण की योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिले की शासकीय एवं अशासकीय गौशालाओं के संचालकों की आवश्यक बैठक लेकर स्पष्ट कर दिया कि अब गौशालाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, गौशाला प्रबंधक और संबंधित विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में कलेक्टर ने हाल ही में किए गए गौशाला निरीक्षणों का जिक्र करते हुए कहा कि कई स्थानों पर व्यवस्थाएं कागजों में तो बेहतर दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक मिली है। कहीं चारे की समुचित व्यवस्था नहीं है, कहीं पानी की स्थायी सुविधा नहीं है, तो कहीं पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में गौवंश की निगरानी तक नहीं हो पा रही है।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि शासन द्वारा गौसंरक्षण के लिए लगातार संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, इसके बावजूद यदि गौवंश सड़कों पर भटकता हुआ दिखाई दे रहा है तो यह सीधे-सीधे प्रबंधन की कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गौशाला का उद्देश्य केवल गौवंश को एक स्थान पर बांधकर रखना नहीं, बल्कि उनके भोजन, पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेना है।

सुबह-शाम चारा-पानी देना होगा अनिवार्य, बनेगा दैनिक टाइम टेबलबैठक में निर्णय लिया गया कि जिले की सभी शासकीय और अशासकीय गौशालाओं के संचालन के लिए अब एक समान दैनिक टाइम टेबल लागू किया जाएगा। इसके तहत सुबह और शाम दोनों समय गौवंश को नियमित रूप से चारा उपलब्ध कराना होगा। साथ ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हर समय सुनिश्चित रखनी होगी। बीमार, घायल अथवा कमजोर पशुओं के लिए अलग से निगरानी और उपचार की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने कहा कि कई गौशालाओं में केवल नाममात्र की व्यवस्था दिखाकर काम चलाया जा रहा है, लेकिन अब नियमित निरीक्षण होगा और वास्तविक स्थिति दर्ज की जाएगी।

हर 50 गायों पर एक गौसेवक, रात्रि चौकीदार की भी व्यवस्थागौवंश की देखरेख में मानवीय संसाधनों की कमी को बड़ी समस्या बताते हुए कलेक्टर ने कहा कि अब प्रत्येक 50 गायों पर कम से कम एक गौसेवक तैनात किया जाना जरूरी होगा। यह गौसेवक चारा डालने, पानी भरने, बीमार पशुओं को अलग चिन्हित करने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके अलावा रात के समय गौवंश के बाहर निकलने और असामाजिक घटनाओं को रोकने के लिए प्रत्येक गौशाला में चौकीदार रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि रात्रिकालीन लापरवाही के कारण ही कई बार सुबह सड़कों पर गौवंश घूमता दिखाई देता है।

जनता की शिकायत पर तुरंत होगी जांच, कंट्रोल रूम का नंबर बाहर लगेगाबैठक में यह भी तय किया गया कि जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां गौशालाओं से संबंधित शिकायतें सीधे दर्ज की जा सकेंगी। इस कंट्रोल रूम का नंबर प्रत्येक गौशाला के मुख्य द्वार पर लिखा जाएगा, ताकि स्थानीय ग्रामीण, राहगीर या गौभक्त यदि किसी प्रकार की कमी देखें तो सीधे प्रशासन को सूचना दे सकें। कलेक्टर ने कहा कि शिकायत मिलने पर संबंधित गौशाला की तत्काल जांच कराई जाएगी और यदि शिकायत सही पाई गई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।

संचालकों को सात दिन का समय, इसके बाद होगा दोबारा निरीक्षणबैठक में मौजूद गौशाला संचालकों को कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि सभी व्यवस्थाएं सुधारने के लिए उन्हें सात दिन का समय दिया जा रहा है। इस अवधि में चारा, पानी, कर्मचारियों, सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़ी कमियों को दूर करना होगा। सात दिन बाद प्रशासनिक टीम फिर से निरीक्षण करेगी। उन्होंने कहा कि गौवंश का सड़क पर रहना केवल यातायात के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह गौशालाओं के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में अब जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित संस्था या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

57 गौशालाओं पर प्रशासन की नजर, बेहतर मॉडल अपनाने की सलाहदमोह जिले में वर्तमान में शासकीय और अशासकीय मिलाकर 57 गौशालाएं संचालित हैं। जिला प्रशासन अब सभी गौशालाओं की अलग-अलग निगरानी करेगा। बैठक में कुछ ऐसी गौशालाओं का उल्लेख भी किया गया जहां नमक की उपलब्धता, छायादार वृक्षारोपण, साफ जल टंकियां और पशुओं के लिए खुले स्थान जैसी व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत बेहतर पाई गईं। कलेक्टर ने अन्य संचालकों से भी ऐसे मॉडल अपनाने को कहा। बैठक के अंत में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि गौसंरक्षण सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर उपेक्षा सामने आई तो सीधे जिम्मेदारी तय होगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव