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दमोहः अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल, ट्रैफिक सिग्नल हटाने से बढ़ी बहस

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दमोहः अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल, ट्रैफिक सिग्नल हटाने से बढ़ी बहस


दमोहः अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल, ट्रैफिक सिग्नल हटाने से बढ़ी बहस


दमोहः अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल, ट्रैफिक सिग्नल हटाने से बढ़ी बहस


दमोह, 19 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र घंटाघर क्षेत्र में शुक्रवार को नगर पालिका, राजस्व प्रशासन और यातायात पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। नगर पालिका की जेसीबी ने फुटपाथ और सड़क किनारे किए गए अस्थायी अतिक्रमण हटाए। हालांकि, कार्रवाई के बाद इसकी निष्पक्षता और प्राथमिकताओं को लेकर शहर में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

कार्रवाई के दौरान सबसे अधिक प्रभावित फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले छोटे दुकानदार और मिट्टी के बर्तन बेचने वाले कुंभकार प्रजापति परिवार रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इसी व्यवसाय के सहारे जीवनयापन करने वाले इन परिवारों पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जबकि बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने किए गए अतिक्रमण पर अपेक्षाकृत नरम रवैया अपनाया गया।

घंटाघर और आसपास के क्षेत्रों में कई दुकानों के सामने सार्वजनिक स्थानों पर सामान रखे जाने, कॉरिडोर पर कब्जा करने और अस्थायी ढांचे खड़े किए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई शुरू होने से पहले कुछ बड़े प्रतिष्ठानों को सामान हटाने का पर्याप्त समय मिला, जबकि छोटे व्यापारियों पर तत्काल कार्रवाई की गई।

मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि मीडिया के पहुंचने के बाद कार्रवाई का स्वरूप बदला, लेकिन तब तक कई प्रतिष्ठान अपना सामान हटा चुके थे। इस बीच, अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान घंटाघर पर स्थापित यातायात सिग्नलों को भी हटाया गया। उल्लेखनीय है कि इन सिग्नलों को कुछ वर्ष पूर्व नगर पालिका ने लाखों रुपये खर्च कर स्थापित किया था। अब इन्हें अनुपयोगी बताते हुए हटाए जाने से नागरिकों के बीच सार्वजनिक धन के उपयोग और योजना निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर की आबादी और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यातायात सिग्नलों को हटाने का निर्णय समझ से परे है। बुजुर्गों के अनुसार, 1980 के दशक में भी घंटाघर चौराहे पर मैन्युअल ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था मौजूद थी, जबकि उस समय यातायात का दबाव वर्तमान की तुलना में काफी कम था।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सड़क सुरक्षा समिति के निर्णय के आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि घंटाघर क्षेत्र में लगे ट्रैफिक सिग्नल अब उपयोगी नहीं रह गए थे और इनके खंभों की आड़ में अतिक्रमण बढ़ रहा था।

बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने किए गए अतिक्रमण के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने भविष्य में कार्रवाई की बात कही, हालांकि कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई।

नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी ने कहा कि यह नगर पालिका की कार्रवाई है और प्रशासनिक दृष्टि से उनकी मौजूदगी मौके पर रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव