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मप्रः कफ सिरप से मौत, दूषित पानी और एनआईसी में चूहे पर जीतू पटवारी का सरकार पर तीखा हमला

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मप्रः कफ सिरप से मौत, दूषित पानी और एनआईसी में चूहे पर जीतू पटवारी का सरकार पर तीखा हमला


भोपाल, 11 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश में लगातार सामने आ रही स्वास्थ्य और प्रशासनिक लापरवाही की घटनाओं को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में “लापरवाही का खतरनाक सिलसिला” जारी है और इसकी कीमत आम जनता अपनी जान देकर चुका रही है।

जीतू पटवारी ने शनिवार काे मीडिया काे जारी अपने बयान में कहा कि जहरीले कफ सिरप के सेवन से करीब 25 लोगों की मौत ने दवा नियंत्रण प्रणाली की पोल खोल दी है। वहीं इंदौर में दूषित पानी पीने से 35 से अधिक लोगों की मौत को उन्होंने “प्रशासनिक विफलता” करार दिया। उनके अनुसार, इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदारी तय करने के बजाय सत्ताधारी पक्ष मुद्दों को अन्य दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहा है, जिससे हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।

पीसीसी चीफ पटवारी ने एम्स भाेपाल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में चूहों की मौजूदगी की खबर को “बेहद गंभीर” बताया। उन्होंने कहा कि एनआईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड में इस तरह की स्थिति न केवल लापरवाही है, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध के समान है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष इंदाैर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत हो चुकी थी। उस मामले में न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। पटवारी ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि एनआईसीयू में चूहों की मौजूदगी बेहद खतरनाक है, क्योंकि नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है और इस तरह के संक्रमण जानलेवा साबित हो सकते हैं।

“यह एक अस्पताल नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता”

उन्होंने कहा कि यदि एम्स भाेपाल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में यह स्थिति है, तो अन्य सरकारी अस्पतालों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। यह केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का संकेत है।

पटवारी ने घटनाओं में समान पैटर्न बताते हुए कई गंभीर कमियां गिनाईं—

दवा नियंत्रण में लापरवाही

पेयजल व्यवस्था में विफलता

अस्पतालों में साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल की कमी

शिकायतों पर समय पर कार्रवाई का अभाव

और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव

सरकार से सीधे सवाल

उन्होंने सरकार से सवाल किया, “क्या मध्य प्रदेश में जनता की जान इतनी सस्ती हो गई है कि बार-बार की लापरवाही के बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे?” साथ ही पूछा, “आखिर कब तक मासूम बच्चे और आम नागरिक इस लापरवाह व्यवस्था की बलि चढ़ते रहेंगे?” पटवारी ने मांग की कि इन सभी मामलों में त्वरित, पारदर्शी और सख्त कार्रवाई की जाए तथा दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे