‘संविधान हत्या दिवस’ पर भाजपा की प्रदेशव्यापी संगोष्ठियां, लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
प्रदेश के विभिन्न शहरों में वरिष्ठ नेताओं ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर हमला, मीसाबंदियों को किया सम्मानित
भोपाल, 25 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने गुरुवार को ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर प्रदेशभर में संगोष्ठियों, प्रदर्शनी और सम्मान कार्यक्रमों का आयोजन किया। कार्यक्रमों में आपातकाल के दौर को याद करते हुए लोकतंत्र सेनानियों और मीसाबंदियों का सम्मान किया गया।
जबलपुर में भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, सागर में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, ग्वालियर में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल, इंदौर में पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तानसिंह सोलंकी, उज्जैन में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया तथा रीवा में वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने संगोष्ठियों को संबोधित किया।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर सबसे बड़ा आघात था आपातकाल : डॉ. महेंद्र सिंह
जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियों में देश किसी युद्ध या गंभीर आंतरिक संकट से नहीं गुजर रहा था, इसके बावजूद लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर आपातकाल लागू किया गया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और पत्रकारों को प्रताड़नाएं झेलनी पड़ीं तथा प्रेस की स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लगाए गए। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश में लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना संभव हो सकी।
लोकतंत्र के इतिहास की दुखद घटना : राजेन्द्र शुक्ल
सागर में आयोजित संगोष्ठी में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटनाओं में से एक था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा नई पीढ़ी को इस दौर के इतिहास से अवगत कराया जाना चाहिए।
संविधान और न्यायपालिका का हुआ अपमान : प्रहलाद पटेल
ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची थी। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके योगदान को प्रेरणादायी बताया।
कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी की परंपरा को पहुंची क्षति : प्रो. सोलंकी
इंदौर में आयोजित संगोष्ठी में पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तानसिंह सोलंकी ने कहा कि आपातकाल लागू करने की प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी की परंपरा को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान आवश्यक है।
संविधान में संशोधनों को लेकर कांग्रेस पर निशाना
उज्जैन में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा कि आपातकाल का दौर देश को यह याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक हितों के लिए संविधान में कई संशोधन करने का आरोप लगाया।
लोकतंत्र के लिए चेतावनी का अध्याय : डॉ. नरोत्तम मिश्रा
रीवा में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आपातकाल केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता सर्वोपरि हो जाती है, तब संविधान, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक अधिकार सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
जबलपुर सहित विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों का शाल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रदर्शनी का उद्घाटन, पौधारोपण कार्यक्रम तथा आपातकाल से जुड़े संस्मरणों का साझा भी किया गया। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों, लोकतंत्र सेनानियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सहभागिता कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

