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रोजगार गारंटी पर कांग्रेस के सवाल, सरकार से मांगा 10 साल का श्वेत पत्र

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रोजगार गारंटी पर कांग्रेस के सवाल, सरकार से मांगा 10 साल का श्वेत पत्र


भोपाल, 05 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मनरेगा, ग्रामीण रोजगार और किसानों के मुद्दे पर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकार रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय योजनाओं के नाम बदलकर प्रचार करने में लगी है। रविवार काे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार पहले मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित नहीं कर सकी, ऐसे में 125 दिन रोजगार देने की नई घोषणा केवल प्रचार का माध्यम है। इस दौरान पूर्व प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट, राहुल राज और मिथुन अहिरवार भी मौजूद रहे।

कुणाल चौधरी ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर जी-राम (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन) किए जाने से रोजगार नहीं बढ़ेगा। उनका दावा था कि सरकार ने पिछले दस वर्षों में मनरेगा के तहत पंजीकृत मजदूरों को 100 दिन का रोजगार भी प्रभावी ढंग से उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायकों प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय द्वारा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि पिछले दस वर्षों में प्रदेश के 52 जिलों में पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत से भी कम लोगों को 100 दिन का रोजगार मिला। चौधरी ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताया।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच मनरेगा में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या अधिक रही, लेकिन 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या लगातार घटती गई। उन्होंने कहा कि वनाधिकार पट्टा धारकों को 150 दिन रोजगार देने के प्रावधान के बावजूद वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 24 जिलों में किसी भी पात्र श्रमिक को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोरोना काल में, जब ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब बड़ी संख्या में जॉब कार्ड समाप्त कर दिए गए। उनके अनुसार वर्ष 2020-21 में 43.43 लाख तथा वर्ष 2021-22 में 7.71 लाख जॉब कार्ड हटाए गए।

पत्रकार वार्ता में चौधरी ने केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चार सवाल भी पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या मनरेगा का नाम बदलने से रोजगार बढ़ जाएगा, 100 दिन की कानूनी गारंटी पूरी नहीं होने पर 125 दिन रोजगार देने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है, पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत से भी कम लोगों को 100 दिन का रोजगार क्यों मिला तथा पिछले दस वर्षों का श्वेत पत्र जारी कर सरकार रोजगार संबंधी वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं करती। किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगभग 20 लाख मीट्रिक टन मूंग उत्पादन के मुकाबले सरकार ने केवल 4.5 लाख मीट्रिक टन मूंग की एमएसपी पर खरीद की अनुमति दी है। चौधरी ने कहा कि इससे बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य का लाभ नहीं ले पाएंगे। उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों की मूंग की 100 प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने की मांग की।

कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश के किसानों और मजदूरों को योजनाओं के नाम बदलने के बजाय रोजगार और उपज का उचित मूल्य चाहिए। पार्टी ने भाजपा सरकार की नीतियों को किसान और मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि वह इन मुद्दों को सड़क से सदन तक उठाती रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे