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दमोहः श्रमिकों की शिकायतों पर डायमंड सीमेंट प्रबंधन को नोटिस

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दमोहः श्रमिकों की शिकायतों पर डायमंड सीमेंट प्रबंधन को नोटिस


दमोहः श्रमिकों की शिकायतों पर डायमंड सीमेंट प्रबंधन को नोटिस


दमोहः श्रमिकों की शिकायतों पर डायमंड सीमेंट प्रबंधन को नोटिस


दमोह, 26 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने शुक्रवार को बताया कि नरसिंहगढ़ स्थित डायमंड सीमेंट प्रॉपर्टियर हाइडलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड में श्रमिकों द्वारा की गई शिकायतों को गंभीरता से लिया गया। शिकायतों के परीक्षण के लिए उनके निर्देश पर श्रम विभाग की औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा शाखा द्वारा फैक्ट्री का विस्तृत निरीक्षण कराया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण अनियमितताएं सामने आई हैं।

कलेक्टर ने बताया कि निरीक्षण के दौरान श्रमिकों के बयान दर्ज किए गए और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि कई श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। हेलमेट, सेफ्टी शूज, दस्ताने, गॉगल्स और अन्य सुरक्षा सामग्री श्रमिकों को स्वयं खरीदनी पड़ रही थी, जबकि इन्हें उपलब्ध कराना फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि निरीक्षण में यह भी सामने आया कि श्रमिकों से अतिरिक्त समय तक कार्य तो कराया जा रहा था, लेकिन नियमानुसार देय ओवरटाइम का दोगुना भुगतान नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा श्रमिकों के लिए रेस्ट रूम और लंच रूम जैसी आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव पाया गया, जो श्रम कानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

कलेक्टर ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कारखाना अधिनियम, 1948 की संबंधित धाराओं के तहत फैक्ट्री प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रबंधन से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रताप नारायण यादव ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले में केवल औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा शाखा ही नहीं, बल्कि श्रम विभाग की सामान्य (जनरल) विंग भी अलग से जांच कर रही है। दूसरी जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोनों रिपोर्टों का परीक्षण कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान में श्रमिकों के अधिकारों, सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन से समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य उद्योगों के संचालन में बाधा उत्पन्न करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिकों को कानून के अनुसार सुरक्षित कार्य वातावरण, उचित सुविधाएं और उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध इसी प्रकार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव