दिल्ली जाने से पहले मप्र के इटारसी में रोके गए सीजेपी कार्यकर्ता, ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया
इटारसी, 9 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारकर रोके जाने का मामला सामने आया है। ये कार्यकर्ता 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दे उठाए जाने थे।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को गोवा एक्सप्रेस से पुणे से दिल्ली की यात्रा कर रहे सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) तथा विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को इटारसी में रोक लिया गया। इनमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) से जुड़े छात्र भी शामिल बताए गए हैं। कार्यकर्ताओं की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कुछ रिपोर्ट में इनकी संख्या 15, जबकि अन्य में 22 बताई गई है।
पुलिस पर बदसलूकी करने का आरोप
कार्रवाई के बाद एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के शुरुआती समय में मौके पर महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें बिना स्पष्ट जानकारी दिए ट्रेन से उतारा गया और इसके बाद दूसरी जगह ले जाया गया। वे दिल्ली में अपने मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे थे।
रिसॉर्ट में ठहराया, कराया गया मेडिकल परीक्षण
जानकारी के मुताबिक, करीब 16 कार्यकर्ताओं को इटारसी स्थित द पार्क रिसॉर्ट में ठहराया गया। शुक्रवार सुबह शासकीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल की टीम ने उनका मेडिकल परीक्षण भी किया। बताया गया कि कार्यकर्ताओं के लिए नाश्ते में पोहा-जलेबी की व्यवस्था की गई थी।
सीजेपी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
इस घटनाक्रम के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि आपातकाल ही घोषित क्यों नहीं कर दिया जाता। संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
इटारसी में कार्यकर्ताओं को रोके जाने की इस घटना ने दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों और उन्हें रोके जाने के कारणों पर पुलिस का पक्ष इस जानकारी में सामने नहीं आया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

