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सागर: पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने उठाई किसानों की आवाज़, सागर जिले को सूखा घोषित करने और कर्ज माफी की मांग

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सागर: पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने उठाई किसानों की आवाज़, सागर जिले को सूखा घोषित करने और कर्ज माफी की मांग


सागर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने सोमवार को सागर जिले सहित पूरे प्रदेश में किसानों के सामने खड़े गंभीर संकट को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री का ध्यान किसानों की ज्वलंत समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल राहत देने की मांग की है।

चौधरी ने कहा कि आज प्रदेश का किसान अल्पवर्षा, खाद-बीज की किल्लत, बिजली संकट, बढ़ती कृषि लागत और कर्ज के बोझ से बुरी तरह दबा हुआ है। एक तरफ सरकार ‘किसान कल्याण वर्ष’ मनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर किसान अपनी खेती और आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी द्वारा 5 प्रमुख मांगें उठाई गई।

सागर जिले के केसली विकासखंड सहित जहां भी अल्पवर्षा के कारण बोनी प्रभावित हुई है, वहां तुरंत सर्वे कराया जाए। आंकड़ों के अनुसार केसली में पिछले वर्ष 576 मिमी बारिश हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 506 मिमी रह गई है। अनुमान है कि यहां लगभग 60% किसान बोनी नहीं कर पाएंगे। सरकार खेतों का आकलन कर प्रभावित किसानों को राहत राशि और फसल बीमा का लाभ तुरंत दे।

ई-टोकन की जटिल प्रक्रिया के कारण ग्रामीण इलाकों के किसान समय पर DAP, यूरिया और अन्य खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। सरकार पर्याप्त खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करे, ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा दे तथा खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक दाम वसूलने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।

अल्पवर्षा के बीच नियमित बिजली न मिलना किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है। सरकार कृषि कार्यों के लिए बिना कटौती के बिजली दे, लो-वोल्टेज और खराब ट्रांसफॉर्मरों की समस्या तुरंत सुधारे। साथ ही, बाजार में मिल रहे नकली बीज, मिलावटी खाद और घटिया कीटनाशकों पर सख्त रोक लगाई जाए।

सूखे व फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के KCC और अन्य कृषि ऋणों पर ब्याज में राहत दी जाए। पात्र किसानों के लिए कर्ज माफी और ऋण पुनर्गठन की व्यवस्था बने। इसके अलावा, MSP पर पारदर्शी खरीदी, समय पर भुगतान और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए।

‘किसान कल्याण वर्ष’ तभी सार्थक होगा जब किसानों को खेत तक पानी, बिजली, खाद और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। आवारा और जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं तथा छोटे व सीमांत किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ मिले।

सुरेंद्र चौधरी ने कहा, किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि किसान समय पर बोनी नहीं कर पाएगा, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। सरकार को किसानों की पीड़ा समझनी होगी। किसान का सम्मान और उसकी आर्थिक सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।

सागर सहित पूरे मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पूर्व मंत्री की इन मांगों के बाद अब देखना यह होगा कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कराकर किसानों को कब तक राहत पहुँचाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे