मप्र में बाल विवाह के मामले बढ़े, पांच साल में ढाई हजार से अधिक नाबालिक बने दूल्हा-दुल्हन
भोपाल, 02 दिसम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बाल विवाह के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह खुलासा मंगलवार को विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों से हुआ है, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच हर साल बाल विवाह के मामलों में वृद्धि दर्ज हुई है। पांच साल में 2550 नाबालिक दूल्हा-दुल्हन बने हैं।
दरअसल, मंगलवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इस संबंध में प्रश्न पूछा था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से सभी सरकारों ने बाल विवाह रोकने का प्रयास किया, लेकिन मध्य प्रदेश में हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि सरकार न केवल इस मुद्दे को लेकर उदासीन है, बल्कि बाल विवाह रोकथाम को लेकर कोई ठोस योजना या दृष्टि भी नहीं रखती।
विधायक जयवर्धन सिंह ने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है, फिर भी 2020 से 2025 तक औसतन 400 से अधिक मामले प्रतिवर्ष दर्ज हुए हैं। उन्होंने विभाग मंत्री से जिलेवार और वर्षवार आंकड़े, साथ ही यह जानकारी भी मांगी कि कितनी नाबालिग लड़कियों ने विवाह के बाद बच्चों को जन्म दिया और उनमें से कितने बच्चों की मृत्यु हुई।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया द्वारा सदन में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, 2020 से हर साल बाल विवाह के मामले बढ़ते चले गए। इधर बाल विवाह के मुद्दे पर राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ सीट से भाजपा विधायक मोहन शर्मा ने कहा कि पहले बाल विवाह सामान्य रूप से हो जाते थे, लेकिन अब प्रशासनिक सक्रियता और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से कई मामलों को रोका जा रहा है।
प्रश्न के जवाब में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों को अनुसार, इस साल 2025 में नवंबर तक बाल विवाह के 538 मामले सामने आए, इनमें सबसे ज्यादा दमोह में 115 नाबालिक के विवाह हुए। इसी तरह 2024 में 529 मामले- सबसे ज्यादा डिंडोरी में 39, साल 2023 में 528 मामले- सबसे ज्यादा राजगढ़ में 87, साल 2022 में 519 मामले- सबसे ज्यादा दमोह में 64 और साल 2021 में 436 मामले सामने आए, जिनमें सबसे ज्यादा 69 दमोह के मामले शामिल हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

