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छिंदवाड़ाः कलेक्टर ने हिमालयन फूड्स एंड डेरिवेटिव्स लिमिटेड का किया औचक निरीक्षण

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छिंदवाड़ाः कलेक्टर ने हिमालयन फूड्स एंड डेरिवेटिव्स लिमिटेड का किया औचक निरीक्षण


छिंदवाड़ा, 15 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ग्रामीणों से प्रदूषण के संबंध में मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने गुरुवार को चौरई ब्लॉक के ग्राम सलैया स्थित हिमालयन फूड्स एंड डेरिवेटिव्स लिमिटेड का औचक निरीक्षण किया।

इस दौरान उन्होंने प्लांट की विभिन्न इकाइयों का बारीकी से अवलोकन किया तथा कंपनी के संचालन, जल प्रबंधन, अपशिष्ट निपटान और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को बताया कि मक्का आधारित उत्पादों का निर्माण करने वाली इस इकाई में पर्यावरण संरक्षण, जल पुनर्चक्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी द्वारा जल पुनर्चक्रण, शून्य तरल बहिर्वहन (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज), वायु प्रदूषण नियंत्रण और बायोगैस के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक संचालन किए जाने की जानकारी दी गई।

प्रतिदिन 400 घन मीटर ताजे पानी का उपयोग -

कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि फैक्ट्री में प्रतिदिन लगभग 400 घन मीटर ताजे कच्चे जल का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) की अनुमति प्राप्त है। फैक्ट्री में उत्पन्न अपशिष्ट जल का उपचार तीन यूएसबी रिएक्टरों तथा एरेशन, एनॉक्सिक और एनारोबिक प्रक्रियाओं से युक्त अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) में किया जाता है। इसके बाद उपचारित जल को इन-हाउस आरओ प्लांट में संसाधित कर लगभग 80 प्रतिशत जल का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग किया जाता है।

कंपनी के अनुसार, जल पुनर्चक्रण प्रणाली की क्षमता लगभग 200 घन मीटर प्रतिदिन है। शेष आरओ रिजेक्ट जल का उपचार विशेष प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अपशिष्ट जल के बहिर्वहन को न्यूनतम करना और जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।

औद्योगिक अपशिष्ट का निर्धारित प्रक्रिया से निपटान -

कंपनी प्रबंधन ने बताया कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रणाली से प्रतिवर्ष लगभग 50 मीट्रिक टन अपशिष्ट नमक उत्पन्न होता है। इसका निपटान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लागू मानकों एवं संबंधित प्राधिकरणों के प्रावधानों के अनुरूप पीथमपुर स्थित री-सस्टेनेबिलिटी द्वारा संचालित औद्योगिक अपशिष्ट निपटान सुविधा में किया जाता है।

बायोगैस से विद्युत उत्पादन की व्यवस्था -

फैक्ट्री में बायोमास आधारित बॉयलर संचालित है। चिमनी से निकलने वाले उत्सर्जन में कणीय पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर लगाया गया है। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि वायु उत्सर्जन को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए आवश्यक नियंत्रण उपाय किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, यूएसबी रिएक्टरों से उत्पन्न बायोगैस का उपयोग जनरेटर सेट के माध्यम से विद्युत उत्पादन में किया जाता है। कंपनी के अनुसार, इस व्यवस्था से मीथेन गैस का उपयोगी दोहन होता है, अनियंत्रित उत्सर्जन की आशंका कम होती है और बाहरी विद्युत आपूर्ति पर निर्भरता घटाने में मदद मिल रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / sandeep chowhan