जनगणना 2027 : मप्र में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य जारी, प्रदेशवासियों से सहयोग की अपील
भोपाल, 14 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 01 मई 2026 से प्रारंभ होकर 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है। प्रदेशवासियों द्वारा इस अभियान में उत्साहपूर्वक सहभागिता की जा रही है।
गृह विभाग की सचिव एवं जनगणना नोडल अधिकारी शिखा गुप्ता ने गुरुवार को बताया कि अभियान के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई है कि कुछ नागरिकों द्वारा स्व-गणना की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद अपनी स्व-गणना आईडी प्रगणकों के साथ साझा नहीं की जा रही है अथवा साझा करने में संकोच किया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों से अनुरोध किया है कि यदि परिवार द्वारा स्व-गणना पूर्ण कर ली गई है, तो प्रगणक के आगमन पर अपनी स्व-गणना आईडी अवश्य साझा करें। इससे नागरिकों का समय बचेगा तथा परिवार की सटीक जानकारी जनगणना अभिलेखों में दर्ज की जा सकेगी। नागरिक सही एवं पूर्ण जानकारी देकर जनगणना 2027 के सफल संचालन में सहभागिता सुनिश्चित करें तथा प्रगणकों को आवश्यक सहयोग प्रदान कर राष्ट्र निर्माण के इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाएं।
अधिकृत परिचय पत्र से प्रगणक की पहचान
नोडल अधिकारी शिखा गुप्ता ने बताया कि जिन परिवारों द्वारा स्व-गणना नहीं की गई है, उनसे आग्रह किया गया है कि वे प्रगणकों को सही, स्पष्ट एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराकर राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग प्रदान करें। प्रत्येक प्रगणक के पास चार्ज अधिकारी द्वारा जारी अधिकृत परिचय पत्र उपलब्ध रहता है। आमजन प्रगणक से उनका परिचय पत्र देखकर उनकी पहचान सुनिश्चित कर सकते हैं।
जनगणना संकलन की जानकारी रखी जाएगी गोपनीय
उन्होंने बताया कि जनगणना के अंतर्गत संकलित की गई समस्त जानकारी जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता। साथ ही, जनगणना के दौरान प्राप्त जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को वर्तमान में प्राप्त किसी हित-लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता तथा न ही कोई नवीन लाभ दिया जा सकता है। जनगणना में प्राप्त जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है तथा व्यक्तिगत जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत भी साझा नहीं की जाती।
जनगणना संकलन की जानकारी न देना दण्डनीय
उन्होंने बताया कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 8 के अनुसार प्रत्येक नागरिक जनगणना में पूछे गए प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य है। जानबूझकर गलत जानकारी देना अथवा जानकारी देने से इंकार करना दंडनीय है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

