जबलपुर : सेवानिवृत्त आई जी को कैट से अंतरिम राहत, वसूली पर रोक
जबलपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जबलपुर पीठ ने मध्य प्रदेश पुलिस के सेवानिवृत्त आईजी डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार को बड़ी राहत प्रदान करते हुए उनके विरुद्ध की जा रही 11.61 लाख रुपये की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अधिकरण ने भारत सरकार, मध्य प्रदेश शासन तथा रीवा के पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार वर्ष 2024 में रीवा रेंज के आईजी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अप्रैल 2026 में रीवा के पुलिस अधीक्षक द्वारा उनके विरुद्ध 11,61,885 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया था। आदेश में कहा गया था कि निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर इसकी वसूली उनकी पेंशन से की जाएगी।
मंगलवार को कैट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस श्रीवास्तव और जस्टिस आर्य शामिल थे, ने दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद डॉ. सिकरवार के विरुद्ध की जा रही वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही भारत सरकार, मध्य प्रदेश शासन और रीवा के पुलिस अधीक्षक से विस्तृत जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
याचिका के अनुसार, वर्ष 2012 में डॉ. सिकरवार का वेतन निर्धारण उनके जूनियर आईपीएस अधिकारियों की तुलना में कम हुआ था। इस वेतन विसंगति को दूर कराने के लिए उन्होंने अपने नियोक्ता भारत सरकार के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद उनका वेतन पुनर्निर्धारित किया गया और संशोधित वेतनमान के आधार पर उन्हें एरियर का भुगतान भी किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने कैट में दलील दी कि डॉ. सिकरवार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे हैं और उनके नियोक्ता भारत सरकार का गृह मंत्रालय तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग है। ऐसे में मध्य प्रदेश शासन अथवा रीवा के पुलिस अधीक्षक को उनके विरुद्ध वसूली का आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वसूली आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि डॉ. सिकरवार ने वेतन निर्धारण के लिए कोई गलत जानकारी या भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

