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अनूपपुर: नगर परिषद बनगवां, डोला, डुमरकछार के कर्मचारियों के संविलियन निरस्त करना वैधानिक- हाईकोर्ट

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अनूपपुर: नगर परिषद बनगवां, डोला, डुमरकछार के कर्मचारियों के संविलियन निरस्त करना वैधानिक- हाईकोर्ट


अनूपपुर, 07 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की तीन ग्राम पंचायतों बनगवां, डोला, डुमरकछार का नगरपरिषद में परिवर्तित होने के बाद कर्मचारियों के संविलियन को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर सभी संबंधित रिट अपीलों को स्वीकार करते हुए 23 जनवरी 2024 को एकल पीठ द्वारा पारित संयुक्त आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 331(2) के तहत अपने पुनरीक्षण अधिकार का प्रयोग करते हुए संविलियन प्रक्रिया की वैधता और औचित्य की जांच की तथा संबंधित कर्मचारियों को आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर भी दिया था। मामले की शुरुआत 26 सितंबर 2016 से हुई।

राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से तत्कालीन ग्राम पंचायत बनगवां सहित डोला, डुमरकछार को नगर परिषद में परिवर्तित किया गया। नगर परिषद के गठन के बाद पूर्व ग्राम पंचायत की संपत्तियों, देनदारियों और कर्मचारियों का निर्धारण करने तथा कर्मचारियों को नवगठित नगर परिषद में संविलियन करने के लिए समितियों का गठन किया गया था। इसके बाद राज्य सरकार के समक्ष संविलियन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें पहुंचीं। शिकायतों में आरोप था कि ऐसे व्यक्तियों का भी संविलियन कर दिया गया, जो तत्कालीन ग्राम पंचायत के कर्मचारी नहीं थे। शिकायतों के आधार पर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास ने जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर संविलियन प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात सामने आई। जांच के बाद राज्य सरकार ने संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

15 जुलाई 2022 को संविलियन रद्द, 22 जुलाई को सेवाएं समाप्त

सुनवाई की प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार ने 15 जुलाई 2022 को संविलियन की कार्यवाही रद्द करने का आदेश जारी किया। इसके परिणामस्वरूप 22 जुलाई 2022 को संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए गए। प्रभावित कर्मचारियों ने राज्य सरकार के 15 जुलाई और 22 जुलाई 2022 के आदेशों को हाईकोर्ट की एकल पीठ में चुनौती दी। 23 जनवरी 2024 को एकल पीठ ने मामलों में फैसला सुनाते हुए दोनों आदेशों को निरस्त करते हुए अधिकारियों को कानून के अनुसार नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर नए सिरे से कार्यवाही करने की स्वतंत्रता दी थी। उक्त फैसले को राज्य सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रहमदत सिंह ने दलील दी कि 15 जुलाई 2022 का आदेश पारित करने से पहले सभी संबंधित कर्मचारियों का पर्याप्त अवसर दिया गया था। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद कहा रिकॉर्ड में 1 अप्रैल 2022 का पत्रा, सुनवाड कार्यक्रम, व्यक्तिगत नोटिस, नोटिस की तामीली और कर्मचारियों के जवाब मौजूद थे। नोटिस भौतिक रूप से तथा व्हाट्सऐप के माध्यम से भी दिए गये थे और कई कर्मचारियों ने अपने जवाब प्रस्तुत किए थे। खंडपीठ ने माना कि राज्य सरकार ने धारा 331(2) के तहत मिली शक्ति का प्रयोग करते हुए संविलियन की वैधता और औचित्य की जांच की थी। इसलिए एकल पीठ द्वारा 15 जुलाई 2022 के आदेश में हस्तक्षेप करना त्रुटिपूर्ण था।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला