home page

न्यूनतम वेतन 30 हजार करने की मांग, बीएमएस ने प्रदेश भर में कलेक्टरों को सौंपा 57 सूत्रीय ज्ञापन

 | 
न्यूनतम वेतन 30 हजार करने की मांग, बीएमएस ने प्रदेश भर में कलेक्टरों को सौंपा 57 सूत्रीय ज्ञापन


भोपाल, 17 अगस्त (हि.स.)। श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने सोमवार को प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद संघ के पदाधिकारियों ने सभी जिलों में कलेक्टरों को 57 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर केंद्र और राज्य सरकार से श्रमिक हित में नीतिगत फैसले लेने की मांग की।

ज्ञापन में न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपए प्रतिमाह करने, ईएसआईसी की वेतन सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपए, ईपीएफ की सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपए और ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 40 लाख रुपए करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

आउटसोर्स और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नीति की मांग

भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री ने बताया कि 57 सूत्रीय मांगपत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाने और उनकी सेवा शर्तों में सुधार की मांग की गई है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर स्थायी कर्मचारी घोषित कर नियमित कर्मचारियों के समान हितलाभ देने की मांग भी की गई है।

संघ ने आठ घंटे काम करने वाले आकस्मिक कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने तथा सुरक्षा गार्ड, चौकीदार, माली, हम्माल, तुलाई सहित अन्य श्रेणी के कर्मचारियों के लिए सेवा, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान लागू करने की मांग की है।

कृषि मंडियों और ग्रामीण श्रमिकों पर भी जोर

कृषि विभाग से जुड़े मुद्दों में वर्ष 2013 से 2019 तक कृषि परियोजनाओं में काम कर चुके किसान मित्रों की सेवा बहाली की मांग शामिल है। हम्माल और तुलावटियों को संबल योजना का लाभ देने तथा कृषि उपज मंडियों में कार्यरत हम्मालों के पारिश्रमिक से जुड़े प्रावधानों में सुधार की मांग की गई है।

मंडी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर शिक्षित एवं योग्य हम्मालों को अवसर देने, कृषि विभाग की ग्रामशाला सहायिकाओं को अन्य विभागों के समान पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।

संघ ने ग्रामीण, वनवासी और बागवानी क्षेत्रों में काम करने वाले कृषि, सीमांत किसानों और मजदूरों के लिए 18 हजार रुपए न्यूनतम मासिक वेतन और वर्ष में कम से कम 180 दिन रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की है।

अतिथि शिक्षक और मिड-डे मील रसोइयों के मुद्दे भी उठाए

स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी मांगों में लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु तक सेवा में रखने और शिक्षक भर्ती की न्यूनतम पात्रता पूरी करने वाले अनुभवी अतिथि शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि का लाभ देते हुए नियमित करने की मांग की गई है।

मिड-डे मील योजना के रसोइयों का मानदेय 10 हजार रुपए प्रतिमाह करने, योजना का निजीकरण समाप्त करने तथा दुर्घटना की स्थिति में निशुल्क उपचार और मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।

संविदा कर्मचारियों के लिए समान सुविधाओं की मांग

संघ ने सभी विभागों में संविदा नीति-2023 लागू करने के साथ संविदा कर्मचारियों को अनुकंपा नियुक्ति, ग्रेच्युटी, NPS और नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश का लाभ देने की मांग की है। वार्षिक अप्रेजल व्यवस्था समाप्त कर 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मचारियों को सेवा निरंतरता देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। परिवहन विभाग में चालक-परिचालक कर्मचारियों के कल्याण के लिए चालक-परिचालक बोर्ड के पुनर्गठन की मांग की गई है।

प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

ओला, उबर, रैपिडो और इनड्राइव जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े वर्कर्स को श्रम कानूनों के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की गई है। संघ ने मोटर वाहन अधिनियम-2025 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था लागू करने और राज्य में संचालित टैक्सियों का किराया तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया है। समिति में भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधि को शामिल करने की मांग भी की गई है।

स्टायपेंड और सीपीसीटी को लेकर भी मांगें

संघ ने कांग्रेस सरकार के दौरान लागू 70, 80 और 90 प्रतिशत स्टायपेंड व्यवस्था समाप्त कर उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार वेतन देने की मांग की है। अनुकंपा नियुक्ति में विभागीय कर्मचारियों के लिए सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पदोन्नति में भी सीपीसीट की बाध्यता हटाने की मांग की गई है।

आंगनबाड़ी, पंचायत सचिव और रोजगार सहायकों के मुद्दे

महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति में आयु सीमा से छूट देने और 50 प्रतिशत पदों पर सीधी विभागीय पदोन्नति की मांग की गई है।

पंचायत सचिवों को शीघ्र समयमान वेतनमान का लाभ देने और उनका संबंधित विभाग में संविलियन करने की मांग है। साथ ही आयुष्मान योजना का लाभ, 20 लाख रुपए तक का बीमा कवर और पंचायत समन्वय अधिकारी (PCO) के पद पर पदोन्नति का अवसर देने की मांग की गई है।

सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली एकमुश्त राशि को 3 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने, रोजगार सहायकों को जिला संवर्ग में शामिल कर पंचायत सहायक सचिव पद पर आवेदन का अवसर देने तथा जनजातीय पंचायतों में पैसा एक्ट के तहत कार्यरत पैसा मोबिलाइजरों की बहाली की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

अतिथि विद्वानों और बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी मांगें

अतिथि विद्वानों को 65 वर्ष तक सेवा में रखने तथा रिक्त पदों के विरुद्ध कार्यरत अतिथि विद्वानों को मासिक मानदेय और अन्य हितलाभ देने की मांग की गई है।

बिजली कंपनियों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को उनके अनुभव के आधार पर सीधी भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग है। विद्युत लाइनों और उपकरणों पर जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को 3 हजार रुपए प्रतिमाह जोखिम भत्ता देने की मांग भी की गई है।

इसके अलावा लंबे समय से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए उच्च श्रेणी में उन्नयन और पदोन्नति नीति लागू करने, उन्हें सीधे वेतन का भुगतान करने तथा बिना ठोस कारण किसी कर्मचारी को सेवा से अलग नहीं करने की मांग की गई है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे