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बीएमसी सागर की वैश्विक स्तर पर धूम, प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलोजी' में प्रकाशित हुआ शोध

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बीएमसी सागर की वैश्विक स्तर पर धूम, प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलोजी' में प्रकाशित हुआ शोध


सागर, 06 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा अनुसंधान एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक और नया इतिहास रच दिया है। बीएमसी के शोध दल द्वारा तैयार किए गए एक महत्वपूर्ण शोधपत्र को विश्व के अत्यंत प्रतिष्ठित और विख्यात मेडिकल जर्नल “वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी” में स्थान मिला है।

बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने शनिवार को बताया कि 5.4 इम्पैक्ट फैक्टर वाले इस ग्लोबल जर्नल में शोध प्रकाशित होना चिकित्सा जगत में बेहद गौरवपूर्ण माना जाता है। यह प्रतिष्ठित शोधपत्र बीएमसी की रिसर्च वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा तथा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं एमआरयू के को-नोडल अधिकारी डॉ. सुमित रावत सहित उनके पूरे शोध दल की कड़ी मेहनत का परिणाम है।

इस अकादमिक सफलता पर वैज्ञानिक डॉ. नीतू मिश्रा ने खुशी जाहिर करते हुए इसका श्रेय डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च, बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर, एमआरयू की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता भटनागर और डॉ. सुमित रावत के सतत मार्गदर्शन और कॉलेज के रिसर्च-फ्रेंडली माहौल को दिया है।

बताया गया है कि बीएमसी की टीम का यह शोध भारत में हेपेटाइटिस-डी वायरस की व्यापकता और उसकी वर्तमान स्थिति पर आधारित है। इसके अंतर्गत देश में हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित मरीजों में हेपेटाइटिस-डी संक्रमण के फैलाव का एक गहन व विस्तृत मेटा-एनालिसिस किया गया है।

यह महत्वपूर्ण अध्ययन 'एपिडेमियोलॉजी स्टडी ग्रुप ऑफ वायरल हेपेटाइटिस' के तकनीकी सहयोग से पूरा हुआ है। इस रिसर्च के निष्कर्ष आने वाले समय में हेपेटाइटिस जैसी घातक बीमारी की समय पर रोकथाम, शीघ्र पहचान और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी उपचार रणनीति व स्वास्थ्य नीतियां तैयार करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. जैन ने इस शोध के व्यावहारिक महत्व को समझाते हुए कहा कि हेपेटाइटिस-बी के मरीजों में यदि हेपेटाइटिस-डी का 'को-इंफेक्शन' हो जाए, तो लिवर से जुड़ी जटिलताएं और जान का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। बीएमसी की टीम द्वारा तैयार किया गया यह मेटा-एनालिसिस देश में इस मूक बीमारी के वास्तविक आंकड़ों और इसकी गंभीरता को समझने के लिए एक प्रामाणिक दस्तावेज साबित होगा। यह क्लिनिकल प्रैक्टिस और भविष्य में मरीजों के सटीक उपचार प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

इस शानदार वैश्विक उपलब्धि पर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने शोध दल को बधाई देते हुए कहा, यह सफलता पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। बीएमसी सागर केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ही नहीं दे रहा, बल्कि उच्चस्तरीय चिकित्सा अनुसंधान में भी लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस प्रकार के वैज्ञानिक शोध संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता को वैश्विक पहचान दिलाते हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के बाद बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर ने मध्य प्रदेश के अग्रणी सुपर-स्पेशियलिटी और रिसर्च केंद्रों की सूची में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर लिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे