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मौत के मुंह से लौटी प्रसूता: सागर बीएमसी के डॉक्टरों ने बचाई मां-बच्चे की जान, अंधविश्वास पर करारा संदेश

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मौत के मुंह से लौटी प्रसूता: सागर बीएमसी के डॉक्टरों ने बचाई मां-बच्चे की जान, अंधविश्वास पर करारा संदेश


सागर, 18 मार्च (हि.स.)। आधुनिक विज्ञान के दौर में भी अंधविश्वास किस तरह जानलेवा बन सकता है, इसका एक गंभीर मामला खुरई क्षेत्र से सामने आया है। समय पर उपचार न मिलने और झाड़-फूंक में उलझने के कारण एक गर्भवती महिला की हालत अत्यंत नाजुक हो गई, लेकिन बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के डॉक्टरों ने अपनी कुशलता से मां और नवजात दोनों की जान बचा ली।

आईसीयू प्रभारी प्रो. डॉ. सर्वेश जैन के अनुसार, 20 फरवरी को महिला को अचेत अवस्था (कोमा) में अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने शुरुआती समय चिकित्सकीय उपचार के बजाय तंत्र-मंत्र में गंवा दिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। भर्ती के दो दिन बाद, महिला कोमा में ही थी, तभी उसने आईसीयू में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह अपने आप में एक चमत्कारी घटना मानी जा रही है।

महिला की स्थिति बेहद नाजुक थी। उसे बचाने के लिए पांच बार डायलिसिस और पांच यूनिट एफएफपी (फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा) चढ़ाना पड़ा। करीब 15 दिनों तक वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही, लेकिन डॉक्टरों की टीम लगातार उपचार में जुटी रही।

कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. अजय सिंह के नेतृत्व में डॉ. अजमल, डॉ. ट्विंकल और डॉ. हिमानी सहित विशेषज्ञों की टीम ने दिन-रात निगरानी कर महिला का सफल इलाज किया। उनके अथक प्रयासों के चलते अब महिला पूरी तरह स्वस्थ है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।

इस सफलता पर बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने एनेस्थीसिया और आईसीयू विभाग की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों के प्रति नकारात्मक धारणा को बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यहां उत्कृष्ट और निःशुल्क उपचार उपलब्ध है, जिससे गरीब मरीजों को बड़ा लाभ मिल रहा है।

मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने इसे संस्थान की कार्यक्षमता का उदाहरण बताते हुए कहा कि बीएमसी का लक्ष्य हर जरूरतमंद तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी सफलता है, बल्कि समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है कि किसी भी गंभीर बीमारी में अंधविश्वास के बजाय समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे