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भोपाल में यूसीसी पर बैठक, विभिन्न संगठनों ने प्रस्तावित कानून पर जताई आपत्तियां

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भोपाल में यूसीसी पर बैठक, विभिन्न संगठनों ने प्रस्तावित कानून पर जताई आपत्तियां


भोपाल, 12 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर रविवार को राजधानी के कोहेफिजा स्थित मेजबान शादी हॉल में विभिन्न मुस्लिम संगठनों, उलेमा, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूसीसी के कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने प्रस्तावित कानून पर अपनी आपत्तियां और सुझाव रखे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एम.डब्ल्यू. (मोहम्मद वज़ीर) अंसारी, वरिष्ठ अधिवक्ता साजिद अली, पूर्व महापौर दीपचंद यादव, एआईएमआईएम मध्यप्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। पूर्व डीजीपी एम.डब्ल्यू. अंसारी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विषय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, लेकिन उनके अनुसार इसे लागू करने से पहले सभी समुदायों और हितधारकों के साथ व्यापक संवाद और सहमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का प्रभाव केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं होगा, बल्कि ईसाई, आदिवासी और अन्य समुदायों की परंपराओं एवं व्यक्तिगत कानूनों पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार समानता को बढ़ावा देना चाहती है तो सामाजिक न्याय, आर्थिक असमानता, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अपने संबोधन के दौरान अंसारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी पर यूसीसी के मुद्दे को लेकर राजनीतिक उद्देश्य से आगे बढ़ाने के आरोप लगाए।

बैठक को संबोधित करते हुए काजी अनस ने कहा कि यूसीसी का विषय केवल निकाह, तलाक या विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा व्यापक मुद्दा माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और बहुलतावादी परंपरा उसकी विशेष पहचान है तथा किसी भी कानून पर निर्णय से पहले सभी पक्षों के साथ संवाद होना आवश्यक है।

काजी अनस ने लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील करते हुए कहा कि विरोध संविधान और कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए आगे भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बैठक में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी यूसीसी के प्रस्तावित स्वरूप पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए सभी समुदायों से व्यापक परामर्श की मांग की। साथ ही जिला स्तर पर बैठकें, ज्ञापन और जनजागरण अभियान चलाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे