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भोपाल में नवसंवत्सर पर शुरू हुए अनुष्ठान, 31 फीट ऊंची गुड़ी बनी आकर्षण का केंद्र, 108 कलशों से सूर्य अर्घ्य

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भोपाल में नवसंवत्सर पर शुरू हुए अनुष्ठान, 31 फीट ऊंची गुड़ी बनी आकर्षण का केंद्र, 108 कलशों से सूर्य अर्घ्य


भोपाल, 19 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 और चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर श्रद्धा और उत्साह का वातावरण रहा। शहर के मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। मां शैलपुत्री की विधि-विधान से आराधना के साथ घट स्थापना, जवारे बोने और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन कर नववर्ष का स्वागत किया गया।

शहर के भेल क्षेत्र में मराठी समाज द्वारा भव्य आयोजन किया गया। मराठी सांस्कृतिक मंडल, पिपलानी ने श्री गणेश मंदिर परिसर में 31 फीट ऊंची गुड़ी स्थापित की, जिसे प्रदेश की सबसे ऊंची गुड़ी होने का दावा किया जा रहा है। शंखनाद और सूर्य अर्घ्य के साथ स्थापित यह गुड़ी पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी रही। नववर्ष के पहले सूर्योदय पर सैकड़ों लोगों ने एकत्र होकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें मराठी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए।

मराठी सांस्कृतिक मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आयोजन को भव्य स्वरूप देने का प्रयास किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। पूरे पिपलानी क्षेत्र में दिनभर उत्सव का माहौल बना रहा और लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नए वर्ष का स्वागत किया।

गायत्री शक्तिपीठ में सामूहिक सूर्य अर्घ्य

गायत्री शक्तिपीठ भोपाल द्वारा उपवन स्वास्थ्य पार्क में आयोजित कार्यक्रम में 108 साधकों ने सामूहिक रूप से सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। शंख, घंटियों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

9 दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ

सूर्य अर्घ्य के साथ ही 9 दिवसीय गायत्री महामंत्र अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ हुआ। साधक जप, तप और यज्ञ के माध्यम से विश्व कल्याण, पर्यावरण शुद्धि और मानव मंगल की कामना करेंगे। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

मंदिरों और घरों में नवरात्रि की परंपराएं

नवरात्रि के पहले दिन शहर के मंदिरों और घरों में घट स्थापना, जवारे बोने और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने की परंपरा निभाई गई। जाटखेड़ी स्थित श्री शिव नारायण मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में सुबह सूर्य दर्शन और शंखनाद के साथ नववर्ष का स्वागत किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे