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भोपाल नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप में लोकायुक्त का छापा, फर्जी बिलिंग से करोड़ों की निकासी से जुड़ा मामला

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भोपाल नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप में लोकायुक्त का छापा, फर्जी बिलिंग से करोड़ों की निकासी से जुड़ा मामला


भोपाल, 15 मार्च (हि.स.)। भोपाल नगर निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में रविवार सुबह लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल वर्कशॉप पर छापा मारा। सुबह करीब 9 बजे लोकायुक्त की टीम माता मंदिर के पास स्थित नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू की।

सूत्रों के अनुसार, बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में शुक्रवार को की गई कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त को सेंट्रल वर्कशॉप में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों के सबूत मिले थे। इन्हीं संकेतों के आधार पर रविवार को यह छापेमारी की गई। सेंट्रल वर्कशॉप में नगर निगम के वाहनों की मरम्मत और अन्य मैकेनिकल कार्य किए जाते हैं।

डेटा सेंटर से जब्त किए गए 10 साल के रिकॉर्ड

इससे पहले शुक्रवार को लोकायुक्त पुलिस ने निगम के फतेहगढ़ स्थित डेटा सेंटर पर भी कार्रवाई की थी। वहां से करीब 10 वर्षों के दस्तावेज और सर्वर डेटा जब्त किया गया था। अब जांच टीम सेंट्रल वर्कशॉप कार्यालय के दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है।

11 मार्च को अपर आयुक्त के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

नगर निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 11 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद अदालत से सर्च वारंट लेकर कार्रवाई की गई।

सॉफ्टवेयर के जरिए बनाए गए फर्जी बिल

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार किए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया।

बिना काम कराए ई-बिल से भुगतान

जांच में सामने आया है कि नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और सेंट्रल वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दर्शाकर भुगतान किया गया। कई मामलों में वास्तविक काम हुआ ही नहीं, लेकिन सिस्टम में ई-बिल तैयार कर भुगतान निकाल लिया गया। कुछ मामलों में जिन विभागों के नाम पर बिल बनाए गए, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।

SAP सॉफ्टवेयर का डेटा भी कब्जे में

लोकायुक्त टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डेटा भी जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जलकार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। अब डिजिटल डेटा के विश्लेषण के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ था या नहीं।

अपर आयुक्त का पक्ष

अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का कहना है कि लेखा शाखा में बिल सीधे तैयार या पास नहीं किए जाते। उनके अनुसार बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद ही भुगतान किया जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे