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भोपाल में श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन, श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों कर्मचारी

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भोपाल में श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन, श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों कर्मचारी


भोपाल, 01 अप्रैल (हि.स.)। देशभर में श्रम संहिताओं के विरोध की गूंज के बीच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी बुधवार को केंद्रीय और स्वतंत्र श्रमिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

एटक, सीटू, इंटक, एआईयूटीयूसी समेत बैंक, बीमा, दूरसंचार और मेडिकल प्रतिनिधियों के संगठनों ने एकजुट होकर श्रम कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद की। पदाधिकारियों ने कहा कि पूरे देश में श्रम संहिताओं का विरोध किया जा रहा है। इसके विरोध में ही आज राष्ट्रव्यापी काला दिवस मनाया गया।

बुधवार शाम करीब 5:30 बजे डाक भवन चौराहे पर बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी और अधिकारी अपने-अपने संगठन के झंडे और बैनर के साथ जुटे। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की। विरोध प्रदर्शन के बाद एक सभा आयोजित की गई, जिसमें कई प्रमुख श्रमिक नेताओं ने अपने विचार रखे।

‘श्रमिक हितों पर हमले’ का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं—वीके शर्मा, एसएस मौर्या, प्रमोद प्रधान, पूषन भट्टाचार्य, विनोद लोगरिया, यशवंत पुरोहित, दीपक रत्न शर्मा, जेपी झंवर, शैलेंद्रकुमार शैली, शैलेंद्र शर्मा और भगवान स्वरूप कुशवाहा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि चार नई श्रम संहिताओं को बिना व्यापक चर्चा और श्रमिक संगठनों से परामर्श के लागू किया जा रहा है।

वक्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा चार नई श्रम संहिताओं को बिना किसी सार्थक चर्चा के लागू करने के प्रयास के विरोध में आज प्रदेश सहित देश भर में राष्ट्रव्यापी काला दिवस मनाया जा रहा है। आज मजदूर और कर्मचारियों ने काली पट्टी और काले बैज धारण कर इन चार श्रम संहिताओं का विरोध किया। उनका आरोप था कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर श्रमिक अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के खिलाफ है।

‘काला दिवस’ के रूप में विरोध

श्रमिकों ने पूरे दिन काली पट्टी और काले बैज पहनकर विरोध जताया। यह प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी ‘काला दिवस’ के तहत किया गया। इससे पहले 12 फरवरी 2026 को भी देशव्यापी हड़ताल के जरिए इन श्रम संहिताओं का विरोध दर्ज कराया जा चुका है।

प्रदेशभर में दिखा असर

केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा, देवास, विदिशा समेत कई जिलों में भी श्रमिक सड़कों पर उतरे। जगह-जगह जुलूस निकाले गए और काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया गया। जगह-जगह जुलूस निकाले गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे