भाेपाल में देशभक्ति गीतों के साथ चयनित संगीत शिक्षकों का प्रदर्शन, डीपीआई कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे
भोपाल, 01 जून (हि.स.)। नियुक्ति की आस में महीनों से इंतजार कर रहे प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 एवं माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 (संगीत एवं नृत्य) के चयनित अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सोमवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए चयनित संगीत शिक्षकों ने भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) कार्यालय के बाहर धरना देकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शनकारियों ने देशभक्ति गीत गाकर अनोखे अंदाज में अपनी पीड़ा व्यक्त की और सरकार से शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और दस्तावेज सत्यापन के महीनों बाद भी उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई है। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से उनमें निराशा बढ़ती जा रही है।
अब पढ़ाई से भरोसा उठने लगा है
बालाघाट से आए चयनित अभ्यर्थी दुर्गेश ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों की पढ़ाई, तैयारी और परीक्षाओं में सफलता के बाद भी यदि नौकरी नहीं मिलती, तो मेहनत का क्या अर्थ रह जाता है। उन्होंने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं पर से भरोसा उठने लगा है। दुर्गेश ने कहा, हमने पूरी मेहनत से परीक्षा पास की, चयन सूची में नाम आया, दस्तावेज सत्यापन भी हो गया, लेकिन आज तक नियुक्ति नहीं मिली। अब गांव लौटकर खेती करने का मन होता है।
8 बार भोपाल आ चुके, हर बार मिला सिर्फ आश्वासन
चयनित शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर अब तक आठ बार भोपाल आकर आंदोलन और ज्ञापन सौंप चुके हैं। हर बार अधिकारियों और विभाग की ओर से जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन धरातल पर कोई प्रगति दिखाई नहीं दी। अभ्यर्थियों के अनुसार करीब 1100 चयनित संगीत एवं नृत्य शिक्षकों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। वे लगातार स्कूल चयन (चॉइस फिलिंग) और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
छह महीने बाद भी नियुक्ति का इंतजार
प्रदर्शन में शामिल पूजा दीक्षित ने बताया कि पात्रता परीक्षा वर्ष 2023 में आयोजित हुई थी, जबकि चयन परीक्षा 2025 में संपन्न हुई। परिणाम घोषित होने और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन के तीन महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई स्पष्ट समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। इससे चयनित अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है।
अब लोग चयन पर भी सवाल उठाने लगे हैं
जबलपुर से भोपाल पहुंचीं चयनित शिक्षिका माधवी चौहान ने कहा कि वे अपनी दो वर्षीय बेटी को घर पर छोड़कर आंदोलन में शामिल होने आई हैं। उन्होंने बताया कि चयन होने के बाद उन्होंने अपने पूर्व कार्यस्थल से दूरी बना ली थी, क्योंकि सभी को विश्वास था कि जल्द सरकारी नियुक्ति मिल जाएगी। माधवी ने कहा कि अब नियुक्ति में लगातार हो रही देरी के कारण लोग उनके चयन पर ही सवाल उठाने लगे हैं। कई लोग तंज कसते हैं कि चयन होने के बावजूद अब तक जॉइनिंग क्यों नहीं मिली। इससे मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
उधार लेकर आंदोलन में शामिल होने पहुंची
सिवनी से आईं भारती ने भावुक होते हुए बताया कि वह सिंगल मदर हैं और अपने छोटे बेटे की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी की उम्मीद में लगातार संघर्ष कर रही हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लग रही है। भारती ने बताया कि भोपाल आने के लिए भी उन्हें परिचितों से पैसे उधार लेने पड़े। उन्होंने कहा कि वर्षों की पढ़ाई, तैयारी और चयन के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलना बेहद पीड़ादायक है। आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
देशभक्ति गीतों से जताया विरोध
धरने के दौरान चयनित शिक्षकों ने देशभक्ति और प्रेरणादायक गीत गाकर सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का सपना लेकर चयनित हुए हैं, लेकिन नियुक्ति में देरी से उनका उत्साह लगातार कम हो रहा है।
ये हैं चयनित शिक्षकों की प्रमुख मांगें
* स्कूल चॉइस फिलिंग प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
* दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए।
* मान्य एवं अमान्य डिग्री तथा पाठ्यक्रमों की सूची सार्वजनिक की जाए।
* नियुक्ति प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा घोषित की जाए।
* अन्य विषयों के चयनित अभ्यर्थियों के समान अवसर और प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

