भोपाल में कोरोना योद्धाओं का अर्धनग्न प्रदर्शन, पीपीई किट पहनकर महिला स्वास्थ्यकर्मी ने जताया विरोध
भोपाल, 15 अक्टूबर (हि.स.)। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले आयुष चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का नौकरी में वापसी की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में 11 दिन से धरने पर बैठे इन स्वास्थ्यकर्मियों ने गुरुवार को अर्धनग्न प्रदर्शन कर सरकार के प्रति नाराजगी जताई।
पुरुष कर्मचारियों ने अर्धनग्न होकर विरोध किया, जबकि महिला स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट पहनकर प्रदर्शन में शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। अब वे पुनर्बहाली और रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश में करीब 4 हजार स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्तियां की गई थीं। संकट के समय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों की नियुक्तियां बाद में समाप्त कर दी गईं। अब कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें फिर से रोजगार दिया जाए और स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों पर संविदा नियुक्ति में प्राथमिकता मिले।
45 डिग्री तापमान में पीपीई किट पहनकर की ड्यूटी
मध्य प्रदेश कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. अंकित असाटी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम किया। उनके मुताबिक, करीब 45 डिग्री तापमान में पीपीई किट पहनकर 10 से 12 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती थी। उस समय सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना योद्धा बताते हुए उनके योगदान की सराहना की थी, लेकिन महामारी का प्रभाव कम होने के बाद बजट की कमी का हवाला देकर सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
असाटी ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने संकट के समय स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने में योगदान दिया, वे आज अपनी बहाली के लिए प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। संघ ने सरकार से मांग की है कि कोरोना काल में सेवाएं देने वाले प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
5 अक्टूबर से जारी है आंदोलन
स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, भोपाल के नीलम पार्क में 5 अक्टूबर से धरना-प्रदर्शन जारी है। इस दौरान कर्मचारी अलग-अलग तरीकों से अपनी मांग उठा चुके हैं। इससे पहले वे मुंडन कराने, केशदान करने और सद्बुद्धि यज्ञ जैसे प्रतीकात्मक कार्यक्रमों के जरिए विरोध जता चुके हैं। अब अर्धनग्न प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि धरना शुरू होने के बाद से अब तक सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे चर्चा करने नहीं पहुंचा है। हालांकि, इस संबंध में सरकार या संबंधित विभाग का पक्ष सामने नहीं आया है।
खाली पदों पर संविदा नियुक्ति की मांग
संघ की प्रमुख मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर कोरोना काल में काम कर चुके कर्मचारियों को संविदा आधार पर नियुक्त किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि उनके पास महामारी के दौरान काम करने का अनुभव है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन राज्यों में कोरोना काल में सेवाएं देने वाले कुछ कर्मचारियों को दोबारा रोजगार देने के कदम उठाए गए हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
बहाली नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
डॉ. असाटी ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। उन्होंने सरकार से बातचीत कर जल्द निर्णय लेने की अपील की। संघ ने चेतावनी दी कि यदि बहाली और रोजगार से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि महामारी के दौरान उनकी सेवाओं और अनुभव को देखते हुए सरकार को उनके भविष्य के बारे में ठोस फैसला करना चाहिए। फिलहाल नीलम पार्क में धरना जारी है और प्रदर्शनकारी बहाली की मांग पर अड़े हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

