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भोपाल के अरेरा कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं होने से रहवासी नाराज, निगम कमिश्नर को सौंपा पत्र

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भोपाल के अरेरा कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं होने से रहवासी नाराज, निगम कमिश्नर को सौंपा पत्र


भोपाल, 12 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल के अरेरा कॉलोनी सहित अन्य आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद फिर सामने आया है। रहवासियों का आरोप है कि आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां जारी हैं, लेकिन संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। सोमवार को संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को पत्र सौंपकर हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों पर कार्रवाई की मांग की।

समिति ने पत्र के साथ हाईकोर्ट के 8 सितंबर को पारित आदेश और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रतियां भी प्रस्तुत कीं। समिति के अनुसार, हाईकोर्ट ने संबंधित मामले में पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने, भू-उपयोग और अनुमतियों की जांच करने तथा निर्धारित चार सप्ताह की समय-सीमा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। रहवासियों का कहना है कि इसके बावजूद अरेरा कॉलोनी में कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं होने से उनकी नाराजगी बढ़ रही है।

आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक उपयोग का आरोप

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का कहना है कि संबंधित संपत्तियों के स्वीकृत नक्शों, विक्रय विलेख और अन्य दस्तावेजों में आवासीय उपयोग दर्ज होने के बावजूद वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। समिति ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति को फ्रीहोल्ड कराने मात्र से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं मिल जाती। इसके लिए संबंधित नियमों के तहत जरूरी अनुमतियां होना भी आवश्यक है।

समिति ने यह भी कहा कि प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 का हवाला देकर मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों को स्वत: वैध नहीं माना जाना चाहिए। समिति के दावे के अनुसार, संबंधित क्षेत्र को प्रस्तावित योजना में आरजी-3 श्रेणी के तहत आवासीय रखा गया है। ऐसे में प्रत्येक संपत्ति के वास्तविक भू-उपयोग, भवन अनुमति और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।

20 से बढ़कर 80 से ज्यादा मामलों का दावा

समिति ने अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों के मामलों में वृद्धि का दावा किया है। उसके मुताबिक, वर्ष 2022 में ऐसे करीब 20 मामले सामने आए थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 80 से अधिक हो गई है। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में सील की गई कुछ संपत्तियों पर दोबारा व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं। रहवासियों ने आशंका जताई कि मास्टर प्लान-2047 लागू होने से पहले कुछ लोग कथित अवैध व्यावसायिक निर्माणों को नियमित कराने का प्रयास कर सकते हैं। समिति ने मांग की कि ऐसे मामलों में नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही निर्णय लिया जाए।

कार्रवाई नहीं हुई तो अवमानना याचिका

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने नगर निगम से अरेरा कॉलोनी सहित अन्य आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक उपयोग की जांच कराने, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संपत्तियों को सील करने और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। समिति ने यह भी कहा कि किसी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि का नियमितीकरण लागू कानूनों और न्यायालय के निर्देशों के विपरीत नहीं होना चाहिए।

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों ने नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो वह हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेगी। फिलहाल नगर निगम की ओर से इस शिकायत पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में पक्ष सामने नहीं आया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे