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जबलपुर : बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को दिया प्रतिवेदन

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जबलपुर : बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को दिया प्रतिवेदन


जबलपुर, 21 जनवरी (हि.स.)। हाईकोर्ट परिसर से जुड़े विवाद में सीनियर एडवोकेट रामेश्वर प्रसाद सिंह ठाकुर पर आरोप लगाये गए है। इस मामले में बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को प्रतिवेदन दिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जिला अधिवक्ता संघ और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को प्रतिवेदन सौंपा है। इस प्रतिवेदन में सीनियर एडवोकेट रामेश्वर प्रसाद सिंह ठाकुर की डेजिग्नेशन रद्द करने की मांग की गई है।

ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर ने ग्वालियर मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जिला अधिवक्ता संघ और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को प्रतिवेदन सौंपा है। इस प्रतिवेदन में सीनियर एडवोकेट रामेश्वर प्रसाद सिंह ठाकुर की डेजिग्नेशन रद्द करने की मांग की गई है। बार एसोसिएशन ने कहा कि यह व्यक्तिगत विवाद नहीं है। यह न्यायपालिका की गरिमा और पारदर्शिता से जुड़ा है। इसलिए इस पर फुल कोर्ट स्तर पर विचार होना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम में राष्ट्रीय शूद्र संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश पटेल का पत्र भी अहम माना जा रहा है। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को लिखे पत्र में 13 जनवरी की घटना को काला अध्याय बताया। प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि रामेश्वर ठाकुर ने पांच अक्टूबर 2024 को सीनियर एडवोकेट बनने के लिए आवेदन दिया। उन्होंने आवेदन में यह घोषणा की थी कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक या दीवानी मामला लंबित नहीं है।

बार एसोसिएशन के अनुसार, थाना सिविल लाइन, जबलपुर में उनके खिलाफ अपराध क्रमांक 195/2022 दर्ज है। यह मामला अभी न्यायालय में लंबित है। इसके अतिरिक्त, उनके द्वारा दायर एक दीवानी वाद भी न्यायिक प्रक्रिया में है। इसे छिपाना गंभीर कदाचार बताया गया है। बार एसोसिएशन ने 13 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट परिसर में हुई घटना को सुनियोजित बताया है। आरोप है कि इस घटना के जरिए अधिवक्ताओं के बीच जातीय आधार पर तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया। एक ऐसी फिर दर्ज कराई गई, जिसमें उन वकीलों के नाम भी शामिल थे, जो मौके पर मौजूद नहीं थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक