बांधवगढ़ में ग्रामीण की जान लेने वाले बाघ का रेस्क्यू, बहेरहा एनक्लोजर में किया गया शिफ्ट
उमरिया, 25 जून (हि.स.)। विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों के हमलों से ग्रामीणों की मौत की घटनाओं के बीच वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ग्रामीण की जान लेने वाले बाघ की पहचान कर उसका सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। गुरुवार पनपथा बफर रेंज क्षेत्र में एक ग्रामीण की मौत के बाद वन विभाग ने तत्काल अभियान चलाकर संबंधित बाघ को पकड़ लिया और सुरक्षित रूप से बाड़े में पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार पनपथा बफर रेंज की पलझा उत्तर बीट के कक्ष क्रमांक आरएफ-604 स्थित अमहा हार क्षेत्र में ग्राम चंसुरा निवासी 60 वर्षीय अन्नू रजक पर एक बाघ ने हमला कर दिया था। इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत और ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का अमला सक्रिय हुआ और बाघ की पहचान के लिए विशेष निगरानी शुरू की गई। जांच और ट्रैकिंग के बाद अधिकारियों ने पांच वर्षीय नर बाघ की पहचान की, जिसे हमले के लिए जिम्मेदार माना गया। इसके बाद वन विभाग ने विशेषज्ञों की टीम के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि रेस्क्यू अभियान विभागीय अधिकारियों की निगरानी में पूरी सावधानी और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया गया। अभियान में क्षेत्र संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक (ताला), वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, संजय टाइगर रिजर्व सीधी के विशेषज्ञ, परिक्षेत्र अधिकारी ताला एवं पनपथा कोर और बफर क्षेत्र के अधिकारी, टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (टीपीएफ) तथा अन्य वनकर्मी शामिल रहे।
वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया। इसके बाद उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और विभिन्न जांचों के लिए रक्त के नमूने भी लिए गए। अधिकारियों के अनुसार बाघ की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य पाई गई है। रेस्क्यू के बाद बाघ को विशेष रूप से तैयार वाहन में विभागीय अधिकारियों और चिकित्सकीय टीम की निगरानी में सुरक्षित रूप से बहेरहा एनक्लोजर पहुंचाया गया। यहां उसकी सतत निगरानी की जाएगी तथा आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल भी उपलब्ध कराई जाएगी।
वन विभाग ने बताया कि रेस्क्यू अभियान को सफल बनाने में लक्ष्मण, सूर्या गणेश और सुन्दरगज नामक प्रशिक्षित हाथियों तथा उनके महावतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इन हाथियों की सहायता से बाघ की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया और अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाल के दिनों में बाघों के हमलों में कई ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, जिसके कारण ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में वन विभाग की यह कार्रवाई मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई है तथा ग्रामीणों से जंगल के संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

