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राजगढ़ः बलराम जन्मोत्सव पर निकला भव्य चल समारोह, राज्यमंत्री टेटवाल ने की पूजा-अर्चना

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राजगढ़ः बलराम जन्मोत्सव पर निकला भव्य चल समारोह, राज्यमंत्री टेटवाल ने की पूजा-अर्चना


राजगढ़, 02 सितम्बर (हि.स.)। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पांदा में घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं श्री बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर बुधवार को धार्मिक आस्था, कृषि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव में आयोजित भव्य चल समारोह में प्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार विभाग राज्यमंत्री गौतम टेटवाल शामिल हुए। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भगवान श्री बलराम की आराधना की।

चल समारोह के दौरान राज्यमंत्री टेटवाल ने भगवान श्री बलराम की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और किसानों की उन्नति की कामना की। इसके बाद राज्यमंत्री ग्राम पांदा स्थित श्री घरणीघर राधाकृष्ण मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बलराम महोत्सव में कृषि संस्कृति और अन्नदाता का सम्मान श्री बलराम कृषि महोत्सव को धार्मिक आयोजन के साथ भारतीय कृषि परंपरा और किसान जीवन से जोड़कर मनाया गया। भगवान श्री बलराम को कृषि, हल और धरती से जुड़े श्रम का प्रतीक माना जाता है। महोत्सव के माध्यम से किसानों की मेहनत, खेती के महत्व और अन्नदाता के सम्मान का संदेश दिया गया।

राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसान और कृषि को हमेशा सम्मान मिला है। खेत, जल, मिट्टी और प्रकृति के संरक्षण के बिना समृद्ध कृषि की कल्पना नहीं की जा सकती। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी कृषि परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत किया पौधारोपण धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। राज्यमंत्री टेटवाल ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया।

उन्होंने कहा कि पेड़ पर्यावरण संरक्षण के साथ जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य से जुड़े हैं। पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। नई पीढ़ी को कृषि परंपरा से जोड़ने की पहल पांदा का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ किसान, कृषि और प्रकृति के सम्मान का संदेश देता नजर आया। ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। चल समारोह के दौरान गांव भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। आयोजकों के अनुसार ऐसे आयोजनों से सांस्कृतिक परंपराएं मजबूत होने के साथ जल, भूमि और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक