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बालाघाट में हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे स्वास्थ्य सुविधा, 100 प्रतिशत टीकाकरण कराएं: डिप्टी सीएम शुक्ल

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बालाघाट में हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे स्वास्थ्य सुविधा, 100 प्रतिशत टीकाकरण कराएं: डिप्टी सीएम शुक्ल


भोपाल, 13 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि बालाघाट के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे जिले को स्वास्थ्य सेवाओं से प्रभावी रूप से कवर किया जाए। कोई भी पात्र व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधा से वंचित न रहे। उन्होंने शत-प्रतिशत टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन और एएनसी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की समय पर पहचान कर नियमित फॉलोअप और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार की व्यवस्था करने को कहा।

उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने रविवार को भोपाल स्थित निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह, आयुक्त धनराजू एस, एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना और बालाघाट कलेक्टर कुँअर सत्यम सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

67 नए मेडिकल ऑफिसर की पदस्थापना

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि बालाघाट में आवश्यकता के अनुसार 67 नए मेडिकल ऑफिसर की पदस्थापना की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए कि इनका प्रभावी उपयोग करते हुए सभी क्षेत्रों में चिकित्सकीय सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य अधिकारी नियमित रूप से मैदानी क्षेत्रों का दौरा करें और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं की निगरानी करें।

उन्होंने मौजूदा स्वास्थ्य संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 2 करोड़ रुपए स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी। साथ ही 2 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , एक उप स्वास्थ्य केंद्र और 2 मोबाइल मेडिकल यूनिट की स्वीकृति के निर्देश दिए। जरूरत के अनुसार आशा और एएनएम के पद भी स्वीकृत किए जाएंगे।

हाई रिस्क गर्भावस्था पर विशेष निगरानी

उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन और सभी आवश्यक एएनसी जांच कराना सुनिश्चित किया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को समय रहते चिन्हित कर नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लिए पहले से तैयारी करने तथा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराने के निर्देश दिए। दूरस्थ क्षेत्रों में बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया, ताकि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान समय पर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

छूटे बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान कर विशेष अभियान चलाया जाए। दूरस्थ और कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में हायर्ड वैक्सीनेटर तथा ऑल्टरनेट वैक्सीन डिलीवरी जैसी व्यवस्थाओं का जरूरत के अनुसार उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र से मुक्त हुआ है। ऐसे क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। पंचायतों को ‘सुमन पंचायत’ के लिए प्रेरित करने और जनप्रतिनिधियों व स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

जन्मजात बीमारियों वाले बच्चों की पहचान और उपचार

उप मुख्यमंत्रीशुक्ल ने जन्मजात बीमारियों से प्रभावित बच्चों की पहचान और समय पर उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा। जन्मजात हृदय रोग, क्लेफ्ट लिप और क्लब फुट जैसी समस्याओं वाले बच्चों को चिन्हित कर आवश्यक सर्जरी एवं उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आरबीएसके के तहत पात्र बच्चों को मिलने वाली निःशुल्क उपचार सुविधा का लाभ अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

पेयजल और बाल पोषण के लिए विभाग मिलकर करें काम

उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पेयजल, स्वच्छता और बाल पोषण को भी प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने अंतर्विभागीय समन्वय से पेयजल व्यवस्था मजबूत करने, आंगनवाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ करने और बच्चों व हितग्राहियों का नियमित फॉलोअप करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने और निर्धारित इंसेंटिव का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने को भी कहा। स्थानीय स्तर की आकस्मिक जरूरतों के लिए उपलब्ध अनटाइड फंड का नियमानुसार उपयोग दवाओं, उपकरणों, परिवहन और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं में करने के निर्देश दिए।

स्वच्छता को जनअभियान बनाने पर जोर

उप मुख्यमंत्रीशुक्ल ने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के साथ स्वच्छता पर भी समान रूप से काम करना जरूरी है। पंचायतों, स्थानीय संस्थाओं और नागरिकों की भागीदारी से विशेष स्वच्छता अभियान चलाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, संस्थागत प्रसव और बच्चों के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं की मैदानी स्तर पर प्रभावी निगरानी की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे