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छह महीने से आयुष्मान का भुगतान अटका, भोपाल में निजी अस्पताल एसोसिएशन का प्रदर्शन

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छह महीने से आयुष्मान का भुगतान अटका, भोपाल में निजी अस्पताल एसोसिएशन का प्रदर्शन


भोपाल, 30 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ बुधवार को भुगतान में देरी और एनएबीएच की अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंचे। प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने जेपी अस्पताल परिसर स्थित आयुष्मान योजना के कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और बकाया भुगतान जल्द जारी करने की मांग की।

यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन (यूपीएचडीए) के उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा ने कहा कि निजी अस्पतालों को पिछले 5-6 महीने से आयुष्मान योजना की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। इससे अस्पतालों के सामने दवाइयों के वेंडर्स, कर्मचारियों और अन्य जरूरी खर्चों का भुगतान करने में परेशानी आ रही है। उन्होंने कहा कि बकाया राशि का तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

भोपाल के 468 निजी अस्पतालों का भुगतान अटका होने का दावा

अस्पताल एसोसिएशन के अनुसार भोपाल में करीब 468 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। संगठन का दावा है कि प्रत्येक अस्पताल का औसतन करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपए तक का भुगतान लंबित है। हालांकि, लंबित राशि का आधिकारिक विभागीय आंकड़ा प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक नहीं किया गया।

एनएबीएच की अनिवार्यता को लेकर भी विरोध

प्रदर्शन के दौरान अस्पताल संचालकों ने आयुष्मान योजना में एनएबीएच की अनिवार्यता का मुद्दा भी उठाया। अस्पताल संगठनों का कहना है कि वे अस्पतालों में गुणवत्ता मानकों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए एनएबीएच की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है।संगठनों का आरोप है कि लगातार आपत्तियां और ज्ञापन देने के बावजूद इस मामले में विभाग का रुख सख्त है। अस्पताल संचालकों को आशंका है कि एनएबीएच की शर्त पूरी नहीं करने वाले कई अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर किया जा सकता है।

1 अक्टूबर से कार्रवाई की आशंका, आधिकारिक सूची का इंतजार

अस्पताल संगठनों का कहना है कि उन्हें विभागीय स्तर से ऐसी जानकारी मिली है कि 1 अक्टूबर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में बड़ी संख्या में अस्पतालों के डी-एम्पैनलमेंट की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, संगठन की ओर से बताई गई इस संभावित कार्रवाई को लेकर अभी तक संबंधित अस्पतालों की अंतिम आधिकारिक सूची या आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ है।

छोटे अस्पतालों के बाहर होने से मरीजों पर असर की चिंता

अस्पताल संचालकों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम अस्पताल आयुष्मान नेटवर्क से बाहर होते हैं तो इसका असर उन मरीजों पर पड़ सकता है, जो अपने घर के नजदीक निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत कैशलेस इलाज कराते हैं। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि किसी भी बड़े पैमाने पर डी-एम्पैनलमेंट से पहले अस्पताल संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाए और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। संगठन का कहना है कि उसका विरोध गुणवत्ता सुधार के खिलाफ नहीं, बल्कि छोटे एवं मध्यम अस्पतालों पर एनएबीएच की अनिवार्यता लागू करने के तरीके को लेकर है।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

अस्पताल संचालकों ने कहा कि यदि बड़े पैमाने पर डी-एम्पैनलमेंट की कार्रवाई की जाती है तो प्रदेशभर के निजी अस्पताल संगठन सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे