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अशोकनगर: जब कागजों पर चमका महाराज का नाम, पर धरातल पर पिता ने खोल दी पोल!

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अशोकनगर: जब कागजों पर चमका महाराज का नाम, पर धरातल पर पिता ने खोल दी पोल!


अशोकनगर, 14 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में सियासत में श्रेय लेने की होड़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन जिले में जो वाकया सामने आया है, उसने न केवल प्रशासनिक अमले को असहज कर दिया है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भी एक नई बहस छेड़ दी है।

आगामी 16 जुलाई को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का जिला दौरा प्रस्तावित है। अमूमन ऐसे बड़े दौरों से पहले प्रशासन और स्थानीय नेता तैयारियों में जुट जाते हैं, लेकिन इस बार उनके आने से पहले ही क्रेडिट वॉर का एक ऐसा मामला उछल गया है जिसने पूरी सुर्खियां बटोर ली हैं।

अखबारों की सुर्खियां और अचानक बदला घटनाक्रम:मंगलवार सुबह जब जिले के लोगों ने अखबार खोले, तो कई प्रमुख समाचार पत्रों में एक ही खबर बड़े-बड़े अक्षरों में तैर रही थी। खबर का सार था—केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अथक प्रयासों की बदौलत मुंगावली की होनहार अनुसूचित जाति की छात्रा खुशबू अहिरवार को उत्कृष्ट छात्रावास में प्रवेश मिल गया है।

कलेक्टर की जनसुनवाई में खुला क्रेडिट का सच:सच्चाई तब सामने आई जब छात्रा खुशबू के पिता संग्राम सिंह खुद मंगलवार को जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाली साप्ताहिक जनसुनवाई में पहुंचे। वे वहां किसी शिकायत के लिए नहीं, बल्कि जिला कलेक्टर को धन्यवाद देने आए थे। संग्राम सिंह ने कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अप्रैल के महीने से वे अपनी बेटी के छात्रावास प्रवेश के लिए भटक रहे थे। कलेक्टर साहब ने उनके आवेदन पर रुचि ली और उन्हीं के प्रयासों से बेटी को रहने की जगह मिल पाई।

अखबार देखकर उड़े होश:जनसुनवाई के बाहर जब पत्रकारों ने संग्राम सिंह को सुबह के अखबारों में छपी खबरें दिखाईं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। संग्राम सिंह ने कैमरे के सामने बेहद सादगी और बेबाकी से कहा-मैंने तो अपने पूरे जीवन में बेटी के हॉस्टल एडमिशन के लिए सिंधिया जी को कोई आवेदन ही नहीं दिया। जब कोई अर्जी ही नहीं दी, तो उनके प्रयास से काम कैसे हो गया? यह देखकर मैं खुद हैरान हूं।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार