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अशोकनगर: प्राचीन माता मंदिर की बदलेगी तस्वीर, भव्य स्वागत द्वार से होगा नया आगाज!

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अशोकनगर: प्राचीन माता मंदिर की बदलेगी तस्वीर, भव्य स्वागत द्वार से होगा नया आगाज!


अशोकनगर: प्राचीन माता मंदिर की बदलेगी तस्वीर, भव्य स्वागत द्वार से होगा नया आगाज!


अशोकनगर: प्राचीन माता मंदिर की बदलेगी तस्वीर, भव्य स्वागत द्वार से होगा नया आगाज!


अशोकनगर,16 अक्टूबर(हि.स.)। आस्था वही, विरासत वही, लेकिन अब स्वरूप होगा और भी भव्य! नवरात्रि के पावन पर्व के बीच मध्य प्रदेश के अशोकनगर में प्राचीन माता मंदिर को संवारने की मुहिम शुरू हो गई है। वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे इस मंदिर की तस्वीर बदलने की दिशा में पहला कदम उठाया गया है। मंदिर परिसर के बाहर भव्य स्वागत द्वार के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया। आने वाले समय में पार्क निर्माण और आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था के जरिए मंदिर परिसर को नया रूप देने की योजना है।

शुक्रवार को मंदिर के महंत धर्मदास की उपस्थिति में समाजसेवी राजेश पाराशर ने वरिष्ठ पत्रकार मनोज जैन एवं देवेन्द्र ताम्रकार से भूमि पूजन संपन्न कराया। खास बात यह है कि यह पहल राजेश पाराशर अपने पिता स्व.आशाराम पाराशर की स्मृति में करा रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल निर्माण कराना नहीं, बल्कि अशोकनगर की धार्मिक विरासत को और अधिक भव्य पहचान दिलाना है। उनका ये भी कहना इसी तरह शहर के पुराना बाजार के विष्णु एवं शिव मंदिर का भी सौंदर्यकरण कराया गया है, एवं जो भी मंदिरों पर शिखर नहीं होंगे उनके शिखर निर्माण के कार्य कराये जाएंगे।

स्वागत द्वार से लेकर रोशनी तक, मंदिर को संवारने की तैयारी:मंदिर के बाहर बनने वाला भव्य स्वागत द्वार श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकता है। इसके साथ ही परिसर में पार्क विकसित करने और लाइटिंग की व्यवस्था करने की योजना भी बनाई गई है। इन कार्यों के पूरा होने पर मंदिर की सुंदरता में वृद्धि होने के साथ श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित और आकर्षक वातावरण मिलने की उम्मीद है।

अशोकनगर के प्राचीन धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान रखने वाले इस मंदिर के विकास की पहल ने एक बार फिर शहर की धार्मिक विरासत और उसके संरक्षण की जरूरत को चर्चा में ला दिया है।

माता की जीवंत प्रतिमा और अनेक देवी-देवताओं के दर्शन:

शहर की रेलवे लाइन के किनारे स्थित यह प्राचीन माता मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है। यहां विराजमान माता की अद्भुत जीवंत प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मंदिर परिसर में भगवान लक्ष्मीनारायण, श्रीराम दरबार, हनुमानजी, गणेशजी, भगवान शंकर और मां अन्नपूर्णा सहित अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, शुरुआत में मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा ही विराजमान थी। बाद में मंदिर का विस्तार हुआ और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं। इस तरह यह मंदिर समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

1962 में भव्य मंदिर निर्माण, अब सौंदर्यीकरण की नई पहल:

मंदिर के महंत धर्मदास के अनुसार, वर्ष 1960 में अयोध्या से महंत बजरंग दास जी का यहां आगमन हुआ था। इसके बाद वर्ष 1962 के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। समय के साथ मंदिर का विस्तार होता गया और इसकी धार्मिक महत्ता भी बढ़ती गई।

अब स्वागत द्वार, पार्क और लाइटिंग की प्रस्तावित योजनाओं के जरिए इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को और आकर्षक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नवरात्रि के दौरान शुरू हुई यह पहल श्रद्धा, सेवा और विरासत के संरक्षण का संदेश दे रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित विकास कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और अशोकनगर के इस प्राचीन आस्था केंद्र को कितना भव्य स्वरूप मिल पाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार