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वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर नाबालिग से लैंगिक अपराध के आरोपित को सजा, दो साल का सश्रम कारावास

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वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर नाबालिग से लैंगिक अपराध के आरोपित को सजा, दो साल का सश्रम कारावास


अशोकनगर, 26 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में नाबालिग बालिका से संबंधित लैंगिक अपराध के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपित प्रतिपाल अहिरवार को दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। पुलिस की ओर से मामले में आयु प्रमाण, चिकित्सकीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सहित विभिन्न प्रमाण जुटाकर आरोप-पत्र न्यायालय में पेश किया गया था।

पुलिस के अनुसार, थाना देहात क्षेत्र के इस प्रकरण में वैज्ञानिक साक्ष्यों और विधिसम्मत विवेचना के आधार पर कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में मामले की विवेचना की गई, जिसमें महिला एवं बालिका संबंधी अपराधों में साक्ष्य संकलन और प्रभावी जांच पर जोर दिया गया।

विवेचना के दौरान पुलिस ने बालिका की आयु के सत्यापन के लिए विद्यालयीन प्रवेश रजिस्टर और जन्मतिथि से संबंधित प्रमाणित अभिलेख प्राप्त किए। लिखित आवेदन के आधार पर अपराध दर्ज करने के बाद बालिका का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। साथ ही घटनास्थल का नक्शा मौका तैयार किया गया।

प्रकरण में बालिका के कथन पुलिस और न्यायालय के समक्ष विधिक प्रावधानों के अनुसार दर्ज कराए गए। पुलिस कथन की वीडियोग्राफी कराई गई और उससे संबंधित प्रमाण-पत्र सहित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।

पुलिस ने विवेचना के दौरान पीड़िता के कथन, परिजनों के समर्थनकारी बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य, आयु संबंधी दस्तावेज, घटनास्थल से जुड़े प्रमाण और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख संकलित किए। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपित के विरुद्ध आरोप-पत्र विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद विशेष न्यायालय ने आरोपी प्रतिपाल अहिरवार को दोषी ठहराया। न्यायालय ने धारा 11 सहपठित धारा 12 के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

वहीं, धारा 11(द्ब1) सहपठित धारा 12 के तहत आरोपित को दो वर्ष के सश्रम कारावास और 1,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। इस प्रकार दोनों धाराओं के तहत कुल 2,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

न्यायालय ने अर्थदंड की कुल राशि 2,500 रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश भी पारित किया। पुलिस ने इस प्रकरण में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और प्रभावी विवेचना को दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण बताया है।

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार