home page

अशोकनगर: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल, पर्यावरण प्रेमी ने घर की छत को बनाया रीसाइक्लिंग और ब्रीडिंग सेंटर

 | 
अशोकनगर: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल, पर्यावरण प्रेमी ने घर की छत को बनाया रीसाइक्लिंग और ब्रीडिंग सेंटर


अशोकनगर: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल, पर्यावरण प्रेमी ने घर की छत को बनाया रीसाइक्लिंग और ब्रीडिंग सेंटर


अशोकनगर: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल, पर्यावरण प्रेमी ने घर की छत को बनाया रीसाइक्लिंग और ब्रीडिंग सेंटर


अशोकनगर: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल, पर्यावरण प्रेमी ने घर की छत को बनाया रीसाइक्लिंग और ब्रीडिंग सेंटर


अशोकनगर, 05 जुलाई(हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर से प्रकृति संरक्षण की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो आज के कंक्रीट के जंगलों में जी रहे समाज को एक नई राह दिखाती है। शहर के मोती मोहल्ला निवासी हेमंत पाठक ने अपने घर की छोटी सी छत को एक अनोखे रीसाइक्लिंग और ब्रीडिंग सेंटर में बदल दिया है। उनका यह जुनून केवल शौक नहीं, बल्कि धरती को हरा-भरा बनाने का एक अनूठा महाअभियान बन रहा है।

छत पर सुलगती पर्यावरण की अनूठी चिंगारी:आमतौर पर लोग घरों की छतों का उपयोग कबाड़ रखने या कपड़ों को सुखाने के लिए करते हैं, लेकिन हेमंत पाठक की छत पर कदम रखते ही एक अलग ही दुनिया नजऱ आती है। मौसमी सीजन में जहां लोग फल खाकर गुठलियां फेंक देते हैं, वहीं हेमंत उन गुठलियों को कचरा नहीं, बल्कि आने वाले कल का ऑक्सीजन प्लांट मानते हैं। वे राह चलते या अपने आसपास बिखरी पड़ी फलों की गुठलियों और कहीं भी कंक्रीट के बीच पल्लवित होते छोटे-छोटे लावारिस पौधों को सहेजकर अपने घर ले आते हैं। इसके बाद शुरू होती है उनकी सेवा और देखरेख की यात्रा।

उपहार में सांसें बांटने का अनोखा संकल्प:हेमंत पाठक का पर्यावरण प्रेम सिर्फ पौधे उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज को जागरूक करने का एक बेहतरीन तरीका खोजा है। बर्थडे और एनिवर्सरी पर ग्रीन गिफ्ट जब ये पौधे उनकी छत पर थोड़े बड़े और मजबूत हो जाते हैं, तो वे इन्हें अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों को उनके जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या अन्य मांगलिक अवसरों पर उपहार स्वरूप भेंट करते हैं। रीफ्यूज टू प्लास्टिक महंगे और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले प्लास्टिक के शो-पीस देने के बजाय, वे जीते-जागते पेड़ उपहार में देते हैं, जो जीवनभर यादें और ऑक्सीजन दोनों देते हैं।

कंक्रीट की छत पर छोटा जंगल:हेमंत के इस जुनून का नतीजा है कि उनकी छोटी सी छत आज जैव-विविधता का केंद्र बन चुकी है। पौधों के प्रकारविशेषता और स्थितिविशेष प्रजाति के आमछत से शुरू हुआ सफर अब बड़े पेड़ों के रूप में तब्दील हो चुका है, जो फल दे रहे हैं। धार्मिक व औषधीय पौधेपीपल, नीम, और बरगद जैसे विशालकाय बनने वाले पौधों को भी वे शुरुआती जीवन देकर सुरक्षित स्थानों पर रोपते हैं।फूल और मौसमी पौधेकई प्रकार के रंग-बिरंगे फूल और औषधीय जड़ी-बूटियों का संग्रह यहां देखते ही बनता है।

पर्यावरण प्रेमी हेमंत पाठक ने रविवार को बातचीत में बताया कि एक गुठली में एक पूरा पेड़ छुपा होता है। उसे कचरे में फेंकने के बजाय अगर थोड़ी सी मिट्टी और पानी मिल जाए, तो वह आने वाली पीढय़िों को छाया और फल दे सकता है। मेरी छत बस इन पौधों का एक अस्थाई ननिहाल है।

समाज के लिए एक बड़ा संदेश:आज जब ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ता तापमान पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, तब अशोकनगर के हेमंत पाठक जैसे जमीनी हीरो बिना किसी सरकारी मदद या बड़े बजट के, व्यक्तिगत स्तर पर समाज को दिशा दे रहे हैं। उनकी यह पहल सिखाती है कि पर्यावरण बचाने के लिए बड़े-बड़े भाषणों की नहीं, बल्कि ऐसे ही छोटे और जुनूनी प्रयासों की जरूरत है। मोती मोहल्ला के इस ग्रीन मैन के जज्बे लोग अपनी छतों को हरा-भरा बनाने का संकल्प ले रहे हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार