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अशोकनगर: सलाखों के पीछे शिक्षा की नई रोशनी, बंदियों के जीवन में बदलाव की पहल

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अशोकनगर: सलाखों के पीछे शिक्षा की नई रोशनी, बंदियों के जीवन में बदलाव की पहल


अशोकनगर: सलाखों के पीछे शिक्षा की नई रोशनी, बंदियों के जीवन में बदलाव की पहल


अशोकनगर: सलाखों के पीछे शिक्षा की नई रोशनी, बंदियों के जीवन में बदलाव की पहल


अशोकनगर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जेल की चारदीवारी के भीतर अब सिर्फ सजा काटने की कहानी नहीं लिखी जा रही, बल्कि यहां शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक बदलाव की नई इबारत भी लिखी जा रही है। बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे और उनके जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से जिला जेल में एक अनूठी पहल की गई।

गुरुवार को वृद्ध दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जेल के वृद्ध एवं निरक्षर बंदियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए जिला शिक्षा केंद्र के माध्यम से ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत सीख दी गई। कार्यक्रम के दौरान बंदियों को अक्षर ज्ञान से परिचित कराया गया और उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया गया।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा केवल पढऩा-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और जीवन के सही रास्ते को समझने की ताकत भी देती है। उम्र के उस पड़ाव पर जब कई लोग शिक्षा से दूर रह जाते हैं, ऐसे में जेल के वृद्ध बंदियों को साक्षरता से जोडऩा अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है। जेल प्रशासन का उद्देश्य है कि बंदी अपनी सजा की अवधि के दौरान केवल समय व्यतीत न करें, बल्कि कुछ नया सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और भविष्य में समाज में लौटने के लिए स्वयं को तैयार करें।

कार्यक्रम के दौरान जेल के एक सजग प्रहरी द्वारा प्रस्तुत किया गया भावुक एवं प्रेरणादायक कविता पाठ आकर्षण का केंद्र रहा। कविता के माध्यम से शिक्षा के महत्व, जीवन की गलतियों से सीख लेने और आगे बेहतर भविष्य की ओर बढऩे का संदेश दिया गया।

प्रहरी की प्रस्तुति ने माहौल को भावनात्मक बना दिया और उपस्थित लोगों ने इसे खूब सराहा। कविता के शब्दों में यह संदेश साफ नजर आया कि गलती इंसान के जीवन का अंत नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर खुद को बदलने का अवसर भी हो सकती है।

यहां जेल में शिक्षा के साथ-साथ बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोडऩे का प्रयास भी दिखाई दे रहा है। इन दिनों जेल परिसर में आराधना के पर्व दुर्गा उत्सव को लेकर भी उत्साह का माहौल है। बंदी स्वयं मां दुर्गा की आराधना के लिए प्रतिमा तैयार करने में जुटे हुए हैं। इससे जहां उनकी रचनात्मक प्रतिभा को अवसर मिल रहा है, वहीं धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सकारात्मक वातावरण तैयार करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

कार्यक्रम में जेल प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ शहर के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इनमें जेलर ललित दीक्षित, डीपीसी एवं जिला परियोजना समन्वयक राहुल शर्मा, बुन्देल गुर्जर, वरिष्ठ पत्रकार देवेन्द्र ताम्रकार, रेडक्रॉस सोसाइटी के उप सभापति राजीव जैन जाट एवं कपिल रघुवंशी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

अशोकनगर जिला जेल की यह पहल इस सोच को मजबूत करती है कि सुधार का रास्ता शिक्षा और सकारात्मक सोच से होकर गुजरता है। निरक्षर बंदियों को अक्षर ज्ञान से जोडऩा, उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना और समाज की मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में प्रयास करना निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है।

जेल की दीवारों के भीतर शुरू हुई यह छोटी-सी पहल उन बंदियों के लिए बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है, जो कभी शिक्षा से दूर रहे। अक्षर ज्ञान की पहली सीढ़ी से शुरू हुआ यह सफर उन्हें आत्मविश्वास, जागरूकता और बेहतर भविष्य की ओर ले जाने का माध्यम बन सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार